प्रतापगढ़। जनपद के पट्टी थाना क्षेत्र के बिजहरा गांव में शुक्रवार दोपहर एक विवाहिता ने पारिवारिक विवाद से आहत होकर जहरीला पदार्थ खा लिया। अचानक हालत बिगड़ने पर घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने बिना समय गंवाए उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पट्टी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की तत्परता और समय पर इलाज से उसकी जान बच गई।
जानकारी के अनुसार, बिजहरा गांव निवासी कोमल मौर्य का किसी बात को लेकर शुक्रवार दोपहर परिजनों से विवाद हो गया था। विवाद के बाद भावनात्मक रूप से आहत होकर उसने घर में रखा कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया। कुछ देर बाद कोमल की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उसे बार-बार उल्टियां आने लगीं। पहले तो परिजनों ने इसे सामान्य समझा, लेकिन जब उसकी हालत लगातार खराब होती गई, तो उन्हें ज़हर खाने का संदेह हुआ।
हैरान-परेशान परिजनों ने फौरन कोमल को लेकर सीएचसी पट्टी का रुख किया। अस्पताल पहुंचते ही वहां मौजूद चिकित्सा टीम ने बिना देरी किए इलाज शुरू कर दिया। सीएचसी के चिकित्सक डॉ. नीरज ने बताया कि कोमल को समय पर लाया गया, जिससे स्थिति नियंत्रित की जा सकी। उन्होंने कहा कि “मरीज की हालत अब स्थिर है, चिंता की कोई बात नहीं है। सही समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच गई है।”
डॉक्टरों के इस बयान के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली, लेकिन पूरे गांव में इस घटना की चर्चा फैल गई। लोगों ने इस बात पर भी राहत जताई कि अगर देर हो जाती, तो मामला जानलेवा साबित हो सकता था। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने कहा कि घरेलू विवाद को लेकर इस तरह के कदम उठाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। परिवार को चाहिए कि ऐसे हालात में बातचीत और समझदारी से स्थिति को संभालें।
गांव के लोगों ने बताया कि कोमल का स्वभाव शांत है और वह घर-परिवार में सबकी मदद करती है। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि वह इस तरह का कदम उठा लेगी। फिलहाल कोमल को अस्पताल में निगरानी में रखा गया है। परिजन हर पल उसके पास मौजूद हैं और उसके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि भावनात्मक क्षणों में जल्दबाजी से लिया गया निर्णय कभी-कभी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। यदि परिजनों की सूझबूझ और डॉक्टरों की तत्परता न होती, तो यह मामला एक दर्दनाक हादसे में बदल सकता था।








