ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाएगा मुक्त विश्वविद्यालय -प्रोफेसर सत्यकाम

पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए निःशुल्क कोर्स

विद्रोही सामना संवाददाता

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को उच्च शिक्षा प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी बनाएगा, जिससे वह अपने पैरों पर खड़े हो सकें। यह बीड़ा उठाया है प्रदेश के एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने।
कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने रविवार को बताया कि मुक्त विश्वविद्यालय यह प्रयत्न कर रहा है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी महिला उच्च शिक्षा से वंचित न रह जाए। इसके लिए लगातार इंटर कॉलेजों, पंचायतों और आंगनबाड़ियों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने सभी को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से ही माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से एम ओ यू किया है। जिससे इंटरमीडिएट उत्तीर्ण शिक्षार्थियों के आंकड़े प्राप्त कर विश्वविद्यालय महिला विद्यार्थियों तक अपनी पहुंच बनाएगा। कुलपति ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय ने पहल करते हुए प्रोत्साहन देने और आकर्षित करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए बाल विकास एवं पोषण में डिप्लोमा कार्यक्रम प्रारंभ किया है। जो उनके लिए मुफ्त में उपलब्ध होगा। ज्ञात हो कि पूरे उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केन्द्रों की संख्या लगभग 1 लाख 89 हजार है।
कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने इस डिप्लोमा में निःशुल्क प्रवेश लेने के लिए सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का आह्वान किया है। प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि यह एक सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्व है। जिसके लिए मुक्त विश्वविद्यालय कृत संकल्पित है। विश्वविद्यालय यह चाहता है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला जो इंटरमीडिएट उत्तीर्ण है वह उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में प्रवेश ले और अपने को समर्थ और सशक्त बनाए।कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि बिटिया पढ़ेगी तो समर्थ होगी। वह सशक्त होगी तो दहेज के लिए जलाई नहीं जाएगी। उन्होंने अभी हाल में ग्रेटर नोएडा में हुई एक दर्दनाक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां दहेज के लिए एक बिटिया को जला दिया गया। यह घटना कदापि न होती यदि वह बिटिया समर्थ और सशक्त होती।कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने लड़कियों के माता एवं पिता का आह्वान किया कि वह अपनी बेटियों को समर्थ बनाएं। उन्हें पराया धन न समझें और उनकी शादी करना ही अंतिम लक्ष्य न रखें। बेटियों को सुशिक्षित करें और आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई बिटिया विवाह के बाद घर लौटती है और अपना दुखड़ा सुनाती है तो माता-पिता को भी जागरूक रहना चाहिए और बिटिया को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार देना चाहिए और घरेलू समर्थन दिया जाना चाहिए।
कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने उत्तर प्रदेश की महिलाओं का आह्वान किया कि वह प्रधानमंत्री जी के उद्देश्य बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को कार्यान्वित करने के लिए उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज की प्रतिबद्धता में अपना सहयोग प्रदान करें, जिससे कोई भी महिला उच्च शिक्षा से वंचित न रह जाए। इसके लिए प्रत्येक नागरिक का सहयोग चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ है। जिसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को उठाना चाहिए।

रूबरू इंडिया न्यूज़ डेस्क
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