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300 फीट ऊंचे बिजली टावर पर चढ़ा युवक, नीचे मची अफरा-तफरी: बहन के साथ अन्याय का आरोप लगाकर बोला- ‘समझौता कैसे करूं?’

प्रयागराज। मऊआइमा थाना क्षेत्र के बादीपुर इलाके में गुरुवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक अचानक करीब 300 फीट ऊंचे हाईवोल्टेज बिजली टावर पर चढ़ गया। युवक को टावर के सबसे ऊपरी हिस्से तक पहुंचा देखकर आसपास मौजूद ग्रामीणों और राहगीरों के होश उड़ गए। देखते ही देखते नेशनल हाईवे और ओवरब्रिज के पास लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। किसी अनहोनी की आशंका से लोग सहम गए और पुलिस को सूचना दी गई।

टावर पर चढ़े युवक की पहचान ख्वाजा के सराय निवासी अब्दुल रहीम के रूप में बताई गई। युवक लगातार अपनी बात रखने की कोशिश कर रहा था और नीचे मौजूद लोगों से बातचीत करना चाहता था, लेकिन टावर की अत्यधिक ऊंचाई के कारण उसकी आवाज नीचे तक साफ नहीं पहुंच पा रही थी। दूसरी ओर हाईवोल्टेज विद्युत लाइन के बेहद करीब युवक के पहुंच जाने से मौके पर मौजूद लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए समझाने-बुझाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों से भी घटनास्थल से दूरी बनाए रखने की अपील की, ताकि युवक पर किसी तरह का दबाव न बने और कोई अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

एक साल पुराने मुकदमे को लेकर नाराजगी का आरोप

युवक का कहना था कि करीब एक साल पहले उसकी शिकायत पर एक मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई। युवक इसी बात को लेकर नाराज था। उसका आरोप था कि वह लगातार पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहा है, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल रहा।

अब्दुल रहीम के मुताबिक, करीब एक साल पहले पड़ोसियों पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया था। उसका कहना था कि आरोपियों ने उसकी गाय को लाठी-डंडों से पीटकर मार डाला था। इसके अलावा जब उसने इस घटना का विरोध किया तो उसकी छोटी बहन के साथ छेड़खानी किए जाने का भी आरोप लगाया गया था।

युवक का दावा है कि उसकी बहन उस समय नाबालिग थी और उसकी उम्र करीब 13 वर्ष है। युवक ने आरोप लगाया कि मामले में पॉक्सो एक्ट से संबंधित कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद उसे और उसके परिवार को समझौता करने के लिए दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

‘मेरी बहन के साथ अन्याय हुआ है, समझौता कैसे करूं?’

टावर पर पहुंचने के बाद युवक ने वीडियो भी बनाया और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की। वीडियो में वह कथित तौर पर कहता नजर आया कि उसकी बहन के साथ अन्याय हुआ है और वह इस मामले में समझौता नहीं करना चाहता।

युवक का आरोप था कि उससे पैसों के लेनदेन के जरिए सुलह-समझौता करने के लिए कहा जा रहा है। उसका सवाल था कि अगर किसी की नाबालिग बहन के साथ कथित तौर पर अन्याय हुआ हो तो वह पैसे लेकर कैसे समझौता कर सकता है।

उसने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसकी लड़ाई न्याय के लिए है। युवक ने आरोप लगाया कि मामले में कार्रवाई कराने के लिए उसे लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन उसकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही।

हालांकि युवक द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस और प्रशासन की ओर से मामले की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्यमंत्री से मिलने का भी किया दावा

अब्दुल रहीम का यह भी कहना था कि वह अपनी शिकायत को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने तक गया था। युवक का दावा है कि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद ही उसके मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।

युवक का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद वह जिस कार्रवाई की मांग कर रहा था, वह पूरी नहीं हुई। इसी वजह से वह काफी समय से परेशान था। गुरुवार को भी वह इसी मामले को लेकर थाने पहुंचा था।

उसका आरोप है कि थाने पर उसकी बात सुनने के बजाय उसे वहां से भगा दिया गया। युवक का दावा है कि इसी से नाराज होकर वह वहां से निकला और वीडियो बनाते हुए बिजली के टावर पर चढ़ गया।

‘मुझसे सबूत मांगे जाते हैं, दूसरी तरफ फर्जी मुकदमे’

टावर से बनाए गए वीडियो में युवक ने पुलिस और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना था कि जब वह अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास जाता है तो उससे सबूत मांगे जाते हैं, जबकि उसके अनुसार दूसरी तरफ से उसके और उसके परिवार के खिलाफ बिना पर्याप्त सबूत के मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।

युवक ने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और आसपास लगे कैमरों की जांच कराने की भी मांग किए जाने की बात कही। उसका आरोप था कि जब उसने कैमरों की जांच की मांग की तो उसे कैमरा बंद या खराब होने की बात बताई गई।

युवक का कहना था कि यदि कैमरों की रिकॉर्डिंग सामने आ जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। वह इसी आधार पर जांच की मांग कर रहा था।

थाने से लौटने के बाद उठाया खतरनाक कदम

बताया गया कि गुरुवार को युवक दोबारा थाने गया था। वहां से लौटने के बाद उसने वीडियो बनाना शुरू किया। देखते ही देखते वह हाईवे के पास स्थित बिजली के टावर पर चढ़ने लगा।

कुछ ही देर में वह टावर के काफी ऊंचे हिस्से तक पहुंच गया। जब लोगों की नजर उस पर पड़ी तो आसपास अफरा-तफरी मच गई। लोग नीचे खड़े होकर उसे आवाज लगाकर वापस आने की अपील करते रहे, लेकिन करीब 300 फीट की ऊंचाई होने के कारण बातचीत करना बेहद मुश्किल था।

सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर थी कि टावर पर हाईवोल्टेज बिजली की लाइनें थीं। ऐसे में युवक की एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती थी।

नेशनल हाईवे पर बढ़ती गई भीड़, यातायात भी प्रभावित

घटना नेशनल हाईवे और ओवरब्रिज के पास हुई थी। इसलिए कुछ ही समय में वहां से गुजर रहे राहगीरों की नजर भी टावर पर चढ़े युवक पर पड़ गई। लोग अपने वाहन रोककर घटना देखने लगे। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों के साथ राहगीरों की भी भारी भीड़ जुट गई।

भीड़ बढ़ने के कारण हाईवे पर यातायात भी प्रभावित होने लगा। पुलिस ने लोगों को मौके से दूर हटाने का प्रयास किया और अपील की कि कोई भी व्यक्ति टावर के आसपास न जाए।

पुलिस का पूरा ध्यान युवक को सुरक्षित नीचे उतारने पर केंद्रित था। किसी भी तरह की जल्दबाजी स्थिति को और गंभीर बना सकती थी।

चौकी इंचार्ज ने संभाली कमान, पुलिस ने शुरू किया समझाने का प्रयास

सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज बृजेश तिवारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने युवक से बातचीत कर उसे नीचे उतरने के लिए मनाने की कोशिश शुरू की।

पुलिस के साथ मौके पर मौजूद ग्रामीण भी युवक को समझाते रहे। लोगों ने उससे नीचे आने की अपील की और भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उसकी बात सुनी जाएगी।

पुलिस ने भी स्थिति को संवेदनशील मानते हुए संयम के साथ बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों का प्रयास था कि किसी तरह युवक को विश्वास में लेकर सुरक्षित नीचे उतारा जाए।

‘वह अपनी मांगों को लेकर कुछ भी बात नहीं कर रहा था’

मामले को लेकर मऊआइमा थाना प्रभारी जगदीश कुशवाहा ने बताया कि पुलिस युवक को समझा-बुझाकर नीचे उतारने का प्रयास कर रही है। थाना प्रभारी के अनुसार युवक से उसकी मांगों के बारे में जानने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन वह कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं बता रहा था।

पुलिस लगातार उससे बातचीत कर रही थी ताकि उसकी स्थिति सामान्य हो और वह खुद टावर से नीचे उतरने के लिए तैयार हो जाए।

करीब पांच घंटे चला हाईवोल्टेज ड्रामा

दोपहर में शुरू हुआ यह घटनाक्रम शाम तक लोगों के लिए चिंता का कारण बना रहा। टावर पर युवक के चढ़ने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी जान बचाना थी। नीचे खड़ी भीड़ की निगाहें लगातार टावर के ऊपर टिकी रहीं।

हर गुजरते मिनट के साथ लोगों की बेचैनी बढ़ती रही। पुलिस और स्थानीय लोग लगातार उसे समझाते रहे। कोई उससे शांत रहने की अपील करता तो कोई परिवार और पुलिस पर भरोसा रखने की बात कहकर नीचे उतरने को कहता।

हाईवोल्टेज लाइन के कारण मामला बेहद संवेदनशील था। पुलिस किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए युवक को बातचीत के जरिए नीचे लाने की कोशिश करती रही।

शाम करीब सात बजे मिली बड़ी राहत

काफी देर तक चले प्रयास के बाद आखिरकार शाम करीब सात बजे युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। युवक के नीचे आते ही पुलिसकर्मियों, ग्रामीणों और मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

जिस टावर को देखकर दोपहर से लोगों की सांसें अटकी हुई थीं, वहां आखिरकार स्थिति सामान्य हुई। पुलिस ने युवक को अपने कब्जे में लेकर मामले के संबंध में पूछताछ शुरू की।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गंभीर शिकायतों को लेकर परेशान व्यक्ति की बात समय रहते सुनी जाए तो शायद ऐसी खतरनाक स्थिति पैदा होने से रोकी जा सकती है। हालांकि युवक ने पुलिस पर जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही रही कि करीब 300 फीट ऊंचे बिजली टावर पर चढ़े युवक को कई घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया गया और एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।

समाजसेवा करने वालों का सम्मान, डॉ. विनोद शंकर दुबे ने बढ़ाया हौसला

समाजसेवियों, पत्रकारों और गुरुजनों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित, जनहित के कार्यों में हर संभव सहयोग का दिया भरोसा

प्रतापगढ़। समाज के विकास, जनसेवा और सामाजिक सरोकारों के लिए निरंतर कार्य करने वाले लोगों का सम्मान न केवल उनके योगदान को पहचान देता है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसी उद्देश्य को लेकर रानीगंज विधानसभा क्षेत्र के गौरा क्षेत्र में समाजसेवियों, पत्रकारों एवं गुरुजनों के सम्मान में विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

विशेष सम्मान समारोह का आयोजन कृष्णा मेमोरियल जन सेवा शोध संस्थान के तत्वावधान में किया गया। समारोह में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, शिक्षकों और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, शिक्षक एवं पत्रकार मौजूद रहे।

समारोह में गौरा क्षेत्र के बेहदौल खुर्द निवासी एवं ग्लोरी इन्फोकॉम प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली के मालिक विनोद शंकर दुबे तथा कृष्णा मेमोरियल जन सेवा शोध संस्थान के सचिव डॉ. जीवन प्रकाश दुबे ने समाजहित में कार्य करने वाले लोगों का सम्मान किया। सम्मान प्राप्त करने वालों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने से जनसेवा की भावना और मजबूत होती है।

समाजसेवियों और पत्रकारों की भूमिका अहम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विनोद शंकर दुबे ने कहा कि समाज को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार जनहित में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाजसेवी जरूरतमंद लोगों की मदद करने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं, जबकि पत्रकार समाज की समस्याओं और आम लोगों की आवाज को जिम्मेदारी के साथ सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि गुरुजन समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा और संस्कार देकर देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे लोगों का सम्मान करना वास्तव में उनके कार्यों के प्रति समाज का सम्मान है। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से समाजसेवा करने वाले लोगों का उत्साह बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।

विनोद शंकर दुबे ने कहा कि समाज में जब अच्छे कार्य करने वालों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलता है तो इससे सकारात्मक माहौल तैयार होता है। इससे युवा पीढ़ी भी सामाजिक कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित होती है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि जरूरतमंदों की सहायता, शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक एकता मजबूत करने और जनहित के कार्यों में सभी लोग अपनी भूमिका निभाएं।

जनसेवा के कार्यों में सहयोग का भरोसा

समारोह के दौरान विनोद शंकर दुबे ने समाजहित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र की तरक्की तभी संभव है, जब वहां के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े हों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं।

उन्होंने कहा कि समाजसेवा किसी पद, प्रतिष्ठा या दिखावे का विषय नहीं है, बल्कि यह जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने का माध्यम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए सामूहिक रूप से काम किया जाए।

सम्मान से बढ़ता है हौसला

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सम्मान समारोह जैसे आयोजन समाज के लिए सकारात्मक संदेश देते हैं। इससे उन लोगों का मनोबल बढ़ता है जो बिना किसी स्वार्थ के लंबे समय से सामाजिक कार्यों में जुटे हुए हैं। वक्ताओं ने कहा कि सम्मान केवल एक अंगवस्त्र या स्मृति चिन्ह तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उस व्यक्ति के संघर्ष और योगदान की सामाजिक स्वीकार्यता का प्रतीक होता है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, शिक्षा और समाजसेवा तीनों क्षेत्र समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पत्रकार जनसमस्याओं को सामने लाते हैं, शिक्षक समाज की भावी पीढ़ी तैयार करते हैं और समाजसेवी जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर सहायता एवं जागरूकता का कार्य करते हैं। ऐसे लोगों का प्रोत्साहन पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

सामाजिक एकता और जरूरतमंदों की मदद पर जोर

समारोह के दौरान सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और जरूरतमंद परिवारों के सहयोग पर विशेष जोर दिया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि समाज के विकास के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। आम नागरिक, सामाजिक संगठन, शिक्षक, पत्रकार और जनप्रतिनिधि जब मिलकर काम करते हैं तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक होता है।

सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को निरंतर जारी रखने तथा समाज के जरूरतमंद वर्ग तक सहायता पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों और सम्मानित व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

ये लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर डॉ. महेंद्र दुबे, डॉ. के.एन. मिश्रा, पूर्व ब्लॉक प्रमुख गौरा राकेश कुमार सरोज, राजेश कुमार पाण्डेय (गुरु जी), पंडित राज नारायण तिवारी, आनंद मिश्रा, शिवाकांत दुबे, आशीष दुबे, कार्यक्रम संचालक विनोद शुक्ला, अश्वनी दुबे, रविशंकर दुबे, ग्राम प्रधान बेहदौल खुर्द रोहित यादव, श्री नारायण दुबे, डॉ. गौरव दुबे, ऋषभ दुबे, अरुण शर्मा, रामबाबू, अंकित, अंकुर, राजू दुबे, प्रदीप एवं अरुण प्रताप सिंह सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

समारोह ने यह संदेश दिया कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों को पहचान और सम्मान मिलने से जनसेवा की भावना और मजबूत होती है। आयोजकों की इस पहल को क्षेत्रवासियों ने सामाजिक एकता और सेवा भावना को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।

महाराष्ट्र में 61.50 लाख की लूट का प्रयागराज कनेक्शन, यूपी STF ने तीन वांछित आरोपियों को दबोचा

महाराष्ट्र पुलिस के इनपुट पर बड़ी कार्रवाई, अंडावा चौराहे के पास से गिरफ्तारी; 1.05 लाख रुपये नकद, आई-10 कार और पांच मोबाइल बरामद

प्रयागराज। महाराष्ट्र के ठाणे ग्रामीण जिले में मुंबई-आगरा हाईवे पर हुई 61.50 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के मामले में उत्तर प्रदेश STF की प्रयागराज फील्ड यूनिट को बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर STF ने कार्रवाई करते हुए लूटकांड में वांछित चल रहे तीन आरोपियों को प्रयागराज से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल सिंह, बीरबल पटेल और नरेश गिरी के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ महाराष्ट्र के शाहापुर थाने में मुकदमा दर्ज बताया गया है।

STF की कार्रवाई के बाद इस बड़े लूटकांड की जांच में नया मोड़ आ गया है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर लूट की रकम के बंटवारे, गिरोह के अन्य सदस्यों और वारदात में इस्तेमाल संसाधनों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

मुंबई-आगरा हाईवे पर 23/24 अगस्त की रात हुई थी वारदात

STF के मुताबिक, 23/24 अगस्त 2026 की रात महाराष्ट्र के ठाणे ग्रामीण जिले के शाहापुर थाना क्षेत्र में मुंबई-आगरा हाईवे पर लूट की वारदात को अंजाम दिया गया था। आरोप है कि अनिल सिंह, बीरबल पटेल और नरेश गिरी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर गोविंद की बोलेरो गाड़ी को निशाना बनाया और उसमें रखे 61.50 लाख रुपये लूट लिए।

इतनी बड़ी रकम की लूट के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। घटना में शामिल आरोपियों की तलाश के दौरान पुलिस को उनके उत्तर प्रदेश में होने की जानकारी मिली। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने यूपी STF से संपर्क कर आरोपियों की गिरफ्तारी में सहयोग मांगा।

महाराष्ट्र पुलिस के इनपुट पर STF ने बिछाया जाल

महाराष्ट्र पुलिस से जानकारी मिलने के बाद यूपी STF की प्रयागराज फील्ड यूनिट सक्रिय हुई। आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों पर निगरानी शुरू की गई। STF ने तकनीकी और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया।

पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण और निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में STF टीम ने लगातार निगरानी की। जांच के दौरान आरोपियों की मौजूदगी प्रयागराज के सराय इनायत थाना क्षेत्र में सामने आई।

STF को जब आरोपियों के एक स्थान पर पहुंचने की पुख्ता जानकारी मिली तो महाराष्ट्र पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई की योजना तैयार की गई।

अंडावा चौराहे के पास भोजनालय से तीनों गिरफ्तार

2 सितंबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे यूपी STF और महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त टीम ने वाराणसी-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंडावा चौराहे के पास एक भोजनालय के निकट घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

अचानक हुई कार्रवाई से आरोपियों को संभलने का मौका नहीं मिला। पुलिस ने मौके से अनिल सिंह, बीरबल पटेल और नरेश गिरी को हिरासत में लिया।

तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.05 लाख रुपये नकद, एक आई-10 कार और पांच मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद नकदी को महाराष्ट्र में हुई लूट की रकम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, बरामद धनराशि की वास्तविक भूमिका और उसके स्रोत को लेकर आगे की जांच महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की जाएगी।

पूछताछ में लूट गिरोह से जुड़े होने की बात सामने आई

STF के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने खुद को एक सक्रिय लूट गिरोह का हिस्सा बताया है। पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी भी सामने आई कि लूट की रकम को वारदात में शामिल गिरोह के सदस्यों के बीच बांटा गया था।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 61.50 लाख रुपये की पूरी रकम किस तरह बांटी गई, कितनी रकम किन आरोपियों तक पहुंची और लूट की शेष रकम कहां है।

इसके साथ ही जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह ने इससे पहले कितनी वारदातों को अंजाम दिया है और महाराष्ट्र के अलावा दूसरे राज्यों में भी इसके सदस्यों की सक्रियता थी या नहीं।

गुजरात में रह रहे थे आरोपी, एक का प्रतापगढ़ से संबंध

गिरफ्तार तीनों आरोपियों के संबंध गुजरात से बताए जा रहे हैं। STF के अनुसार अनिल सिंह गुजरात के सूरत में रह रहा था, जबकि उसका मूल निवास प्रतापगढ़ बताया गया है।

वहीं बीरबल पटेल अहमदाबाद और नरेश गिरी मेहसाणा, गुजरात का रहने वाला बताया गया है।

महाराष्ट्र में वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों के उत्तर प्रदेश पहुंचने और अलग-अलग स्थानों पर रहने की जानकारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी प्रयागराज क्यों आए थे और क्या यहां भी गिरोह के अन्य सदस्यों से उनकी मुलाकात या संपर्क हुआ था।

पूछताछ में महाराष्ट्र पुलिस के SI का नाम आने से जांच में नया मोड़

इस मामले में पूछताछ के दौरान एक और गंभीर दावा सामने आया है। STF के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया कि उनके गिरोह में महाराष्ट्र के ठाणे ग्रामीण जिले के कसर थाना क्षेत्र से संबंधित SI राजेश सविता भी शामिल था।

आरोपियों ने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि उक्त पुलिसकर्मी और अन्य साथियों के सहयोग से लूट की घटनाओं को अंजाम दिया गया।

हालांकि, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि पुलिसकर्मी की कथित भूमिका फिलहाल केवल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए दावे तक सीमित है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पुलिसकर्मी की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

यदि जांच में आरोपियों के इस दावे की पुष्टि होती है तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा इस बिंदु पर भी विस्तृत जांच किए जाने की संभावना है।

पांच मोबाइल फोन भी बरामद, डिजिटल कड़ियां खंगालेगी पुलिस

गिरफ्तारी के दौरान पांच मोबाइल फोन बरामद होना भी जांच में अहम माना जा रहा है। पुलिस इन मोबाइल फोन से आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों, कॉल डिटेल, आपसी बातचीत और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि लूट की वारदात से पहले आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ था और घटना के बाद वे किन लोगों के संपर्क में थे।

आई-10 कार के संबंध में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है कि उसका इस्तेमाल लूटकांड के दौरान किया गया था या गिरफ्तारी के समय आरोपी उसमें मौजूद थे।

सराय इनायत थाने में दाखिल कराए गए आरोपी

गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को सराय इनायत थाने में दाखिल कराया गया। चूंकि मामला महाराष्ट्र के शाहापुर थाने में दर्ज है, इसलिए आगे की कानूनी कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की जा रही है।

महाराष्ट्र पुलिस आरोपियों को सीजेएम प्रयागराज की अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लेने की कार्रवाई में जुटी है। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपियों को महाराष्ट्र ले जाया जाएगा, जहां शाहापुर थाना पुलिस उनसे लूटकांड के संबंध में विस्तृत पूछताछ करेगी।

महाराष्ट्र ले जाने के बाद पुलिस वारदात में आरोपियों की वास्तविक भूमिका, लूट की रकम, गिरोह के अन्य सदस्यों और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों के बारे में जानकारी जुटाएगी।

अब गिरोह के बाकी सदस्यों पर नजर

तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का अगला फोकस गिरोह के अन्य सदस्यों पर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लूट की वारदात में कुल कितने लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका थी।

साथ ही लूटी गई 61.50 लाख रुपये की रकम में से कितनी धनराशि बरामद हो चुकी है और शेष रकम कहां है, इसका भी पता लगाया जा रहा है।

पुलिस आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी भी जुटा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि गिरफ्तार तीनों आरोपी केवल महाराष्ट्र की इस वारदात तक सीमित थे या किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं।

बड़ी रकम की लूट से शुरू हुई जांच, प्रयागराज में गिरफ्तारी तक पहुंचा मामला

महाराष्ट्र में हाईवे पर लाखों रुपये की लूट से शुरू हुई जांच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी है। 61.50 लाख रुपये की लूट के मामले में तीन वांछित आरोपियों की प्रयागराज से गिरफ्तारी ने जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल भी खड़े किए हैं।

STF की कार्रवाई में नकदी, कार और मोबाइल फोन की बरामदगी हुई है, जबकि पूछताछ में सामने आए कथित बयानों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच की दिशा भी खुली है।

अब महाराष्ट्र पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि हाईवे पर हुई इस बड़ी लूट की पूरी साजिश कैसे रची गई, लूटी गई रकम का कितना हिस्सा आरोपियों के पास पहुंचा और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।

रुबरु इंडिया न्यूज

80 साल पुराना रास्ता बंद होने से मचा हाहाकार, डीएम के दरबार पहुंचे ग्रामीण; बोले- रास्ता खुलवाइए साहब,

80 साल पुराना रास्ता बंद होने से मचा हाहाकार, डीएम के दरबार पहुंचे ग्रामीण; बोले- रास्ता खुलवाइए साहब, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज हुआ मुश्किल

प्रतापगढ़। पृथ्वीगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या-15 औवार में यादव बस्ती और पाल बस्ती को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को बंद किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। रास्ता बंद होने के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में गांव के बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी प्रतापगढ़ से मुलाकात कर रास्ता बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए मामले में तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई।

ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता कोई नया या अस्थायी रास्ता नहीं है, बल्कि करीब 80 वर्षों से भी अधिक समय से लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते चले आ रहे हैं। इसी रास्ते से यादव बस्ती और पाल बस्ती के लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल तथा अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचते हैं। अचानक मुख्य मार्ग बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिल उठायी मांग

बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों के अस्पताल पहुंचने तक पर संकट

ग्रामीणों ने बताया कि रास्ता बंद होने का सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बस्ती के बच्चों को स्कूल जाने के लिए अब लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। कई बच्चों के लिए यह परेशानी रोजाना की समस्या बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर स्कूल पहुंचने में दिक्कत होने के साथ ही छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावक चिंतित हैं।

वहीं, किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने की स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक मुख्य मार्ग बंद होने के कारण मरीजों को अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय लग सकता है। आपात स्थिति में यह देरी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि रास्ते को तत्काल बहाल कराया जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने में परेशानी न उठानी पड़े।

रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाना भी मुश्किल

स्थानीय लोगों के अनुसार इसी रास्ते से ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरत का सामान लाते-ले जाते हैं। रास्ता बंद होने के बाद लोगों को दूसरे मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे दूरी और परेशानी दोनों बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस्तेमाल में रहे इस रास्ते के बंद होने से पूरे क्षेत्र का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि रास्ता उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि वर्षों से उनकी बस्ती को मुख्य मार्ग और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। उनका आरोप है कि रास्ता बंद होने से दो बस्तियों के सैकड़ों लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।

बच्चे-बुजुर्ग और महिलाएं लेकर पहुंचे अपनी फरियाद

मंगलवार को ग्रामीणों का समूह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा तो उनके साथ बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखते हुए रास्ता खुलवाने की मांग की। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते रास्ता बहाल नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मौके की जांच कराने तथा राजस्व एवं संबंधित अधिकारियों को भेजकर रास्ते की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने वर्षों से चले आ रहे आवागमन के रास्ते को बहाल कराने की अपील की।

प्रशासन से ग्रामीणों को कार्रवाई की उम्मीद

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जिला प्रशासन से पूरी उम्मीद है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। लोगों ने कहा कि रास्ता बंद होने का सीधा असर बच्चों की शिक्षा, मरीजों के उपचार और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को जल्द से जल्द मामले की जांच कराकर ग्रामीणों के आवागमन की समस्या का समाधान करना चाहिए।

फिलहाल ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी फरियाद पहुंचा दी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। 80 वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे बताए जा रहे इस मार्ग को लेकर ग्रामीणों की मांग है कि जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि रास्ता सार्वजनिक आवागमन का है तो उसे तत्काल बहाल कराया जाए।

भाषा विवाद के बीच कासिम की भावुक अपील- गरीब की मेहनत और उसके बच्चों का भविष्य मत छीनिए

मराठी भाषा विवाद पर मुंबई हाईकोर्ट में प्रतापगढ़ के मोहम्मद कासिम ने रखा पक्ष, बोले- भाषा नहीं, गरीब ड्राइवरों की रोजी-रोटी और अधिकारों की लड़ाई

प्रतापगढ़। महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रतापगढ़ के याचिकाकर्ता मोहम्मद कासिम ने मुंबई हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए साफ किया है कि उनकी लड़ाई मराठी भाषा या मराठी भाषी लोगों के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि वह मराठी सहित संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त सभी 22 भाषाओं का सम्मान करते हैं। उनके द्वारा उठाया गया मुद्दा भाषा से कहीं अधिक गरीब और मेहनतकश लोगों की आजीविका तथा उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे मीडिया से बातचीत में मोहम्मद कासिम ने अपने पक्ष को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से लोग रोजगार की तलाश में मुंबई आते हैं। मुंबई देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों के लिए रोजगार का बड़ा केंद्र है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो टैक्सी, कैब और अन्य परिवहन सेवाओं से जुड़े होकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

भाषा के आधार पर रोजगार प्रभावित होने पर जताई चिंता

मोहम्मद कासिम ने कहा कि मुंबई में टैक्सी और कैब चलाने वाले कई चालक अपनी रोज की कमाई से परिवार का खर्च चलाते हैं। उनके मुताबिक कई ड्राइवर प्रतिदिन लगभग 500 से 1000 रुपये तक कमाकर अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं। इसी आमदनी से घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई, किराया और दूसरी जरूरी जरूरतें पूरी की जाती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष भाषा को बोलने में सक्षम नहीं है तो केवल इसी आधार पर उसकी आजीविका प्रभावित करना कितना उचित है। उनका कहना है कि किसी गरीब ड्राइवर का बैज, परमिट या लाइसेंस केवल भाषा संबंधी शर्तों के कारण रद्द होने की स्थिति में इसका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

कासिम ने कहा कि एक ड्राइवर के पीछे उसका पूरा परिवार खड़ा होता है। वह व्यक्ति रोज सड़क पर वाहन चलाकर जो पैसा कमाता है, उसी से बच्चों की पढ़ाई और परिवार का जीवन चलता है। ऐसे में रोजगार से जुड़े किसी दस्तावेज या अनुमति पर असर पड़ना परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर सकता है।

‘मराठी का सम्मान, सभी 22 भाषाओं का सम्मान’

मोहम्मद कासिम ने स्पष्ट किया कि उनकी याचिका को मराठी भाषा के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत भाषाई और सांस्कृतिक विविधता वाला देश है और हर भाषा का अपना महत्व है। वह मराठी भाषा और मराठी भाषी समाज का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त सभी 22 भाषाओं का समान रूप से सम्मान किया जाना चाहिए। उनका उद्देश्य किसी भाषा की गरिमा को कम करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भाषा से जुड़े किसी प्रावधान के कारण गरीब व्यक्ति की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

कासिम के अनुसार, भाषा सीखना और किसी भाषा का सम्मान करना अलग विषय है, जबकि किसी व्यक्ति के रोजगार के अधिकार को प्रभावित करना अलग संवैधानिक प्रश्न है। उनका जोर इसी बात पर है कि भाषा संबंधी किसी व्यवस्था को लागू करते समय गरीब और दूसरे राज्यों से आए मेहनतकश लोगों के हितों को भी ध्यान में रखा जाए।

अधिसूचना की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला चाहते हैं कासिम

मोहम्मद कासिम के मुताबिक, उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट के समक्ष संबंधित अधिसूचना की संवैधानिक वैधता का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से यह बात सामने रखी गई है कि फिलहाल एक वर्ष तक आरटीओ द्वारा इस मामले में कार्रवाई नहीं की जाएगी।

हालांकि कासिम का कहना है कि केवल कार्रवाई पर अस्थायी रोक या एक वर्ष की अवधि निर्धारित किए जाने से मूल सवाल खत्म नहीं होता। उनके मुताबिक संबंधित अधिसूचना अभी भी अस्तित्व में है और इसी वजह से वह चाहते हैं कि अदालत मामले की मेरिट पर सुनवाई करते हुए इस अधिसूचना की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला दे।

उनका तर्क है कि यदि किसी अधिसूचना के कारण भविष्य में गरीब टैक्सी और कैब चालकों के रोजगार पर प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है, तो इस मुद्दे का स्थायी और स्पष्ट कानूनी समाधान जरूरी है।

आरटीओ कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया

कासिम ने आरटीओ से जुड़ी संभावित कार्रवाई को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि टैक्सी और कैब चालकों के लिए बैज, परमिट और लाइसेंस उनकी आजीविका से सीधे जुड़े हुए हैं। इनमें से किसी पर कार्रवाई होने का मतलब संबंधित चालक की कमाई रुक जाना हो सकता है।

उन्होंने कहा कि किसी चालक के पास वाहन होने के बावजूद यदि वह कानूनी रूप से उसे चलाकर कमाई नहीं कर सकता, तो उसके सामने परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए इस पूरे मामले को केवल भाषा के सवाल के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, आजीविका और अधिकारों के व्यापक मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।

देश के अलग-अलग हिस्सों से मुंबई पहुंचते हैं कामगार

मोहम्मद कासिम ने कहा कि मुंबई की अर्थव्यवस्था में दूसरे राज्यों और क्षेत्रों से आने वाले कामगारों की भी भूमिका है। रोजगार की तलाश में लोग यहां आते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में मेहनत करके अपना जीवन चलाते हैं। टैक्सी और कैब चालक भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

उनका कहना है कि इन चालकों में कई ऐसे लोग हैं जिनके परिवार उनके ऊपर आर्थिक रूप से पूरी तरह निर्भर हैं। यदि रोजगार के लिए अतिरिक्त भाषा संबंधी शर्तें इस तरह लागू होती हैं कि उससे किसी व्यक्ति की आजीविका छिनने की स्थिति पैदा हो जाए, तो इस पर संवैधानिक दृष्टि से विचार किया जाना आवश्यक है।

‘मेरी लड़ाई किसी समुदाय के खिलाफ नहीं’

मीडिया से बातचीत के दौरान कासिम ने बार-बार स्पष्ट किया कि उनका पक्ष किसी भाषाई समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषी लोगों के अधिकार और सम्मान का वह भी उतना ही सम्मान करते हैं, जितना देश की अन्य भाषाओं और उनके बोलने वालों का।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में किसी तरह का विवाद या वैमनस्य पैदा करना नहीं है। वह केवल यह चाहते हैं कि कानून और सरकारी नीतियों को इस तरह लागू किया जाए जिससे गरीब और मेहनतकश लोगों की आजीविका असुरक्षित न हो।

परिवारों की आर्थिक सुरक्षा का भी सवाल

कासिम ने कहा कि एक टैक्सी या कैब चालक की नौकरी केवल उसकी व्यक्तिगत आय का साधन नहीं होती। उससे पत्नी, बच्चे, माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की जरूरतें जुड़ी होती हैं। यदि चालक का लाइसेंस, परमिट या बैज प्रभावित होता है तो उसके परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी सीधा असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और आजीविका के अधिकार को ध्यान में रखते हुए संतुलित व्यवस्था जरूरी है। भाषा का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन किसी व्यक्ति की मेहनत से जुड़ी रोजी-रोटी भी महत्वपूर्ण है।

मामले के अंतिम न्यायिक निर्णय पर नजर

मोहम्मद कासिम का कहना है कि वह अदालत से इस पूरे मामले पर स्पष्ट और अंतिम न्यायिक निर्णय चाहते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति को लेकर कोई असमंजस न रहे। उनका कहना है कि सरकार द्वारा फिलहाल एक वर्ष तक आरटीओ कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है, लेकिन अधिसूचना की संवैधानिक स्थिति का अंतिम निर्धारण अदालत द्वारा मामले की मेरिट के आधार पर किया जाना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य मराठी भाषा को चुनौती देना नहीं, बल्कि गरीब टैक्सी और कैब चालकों के अधिकारों की रक्षा करना है। कासिम के मुताबिक, भाषा का सम्मान और गरीब की रोजी-रोटी की सुरक्षा—दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी भाषाई विविधता और संवैधानिक व्यवस्था से है। ऐसे में किसी भी नीति या अधिसूचना को लागू करते समय सभी वर्गों के अधिकारों और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। यही वजह है कि उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट में इस मुद्दे को व्यापक संवैधानिक सवाल के रूप में उठाया है।

बारिश में जर्जर कच्ची दीवार ढही, एक ही परिवार के चार लोग मलबे में दबे; 7 वर्षीय बच्ची गंभीर

प्रतापगढ़। देहात कोतवाली क्षेत्र के सराय बहेलिया गांव के हनुमान का पुरवा में सोमवार रात बारिश के दौरान जर्जर कच्ची दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में एक ही परिवार के चार लोग मलबे में दबकर घायल हो गए। घायलों में 7 वर्षीय बच्ची देवांशी की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए प्रयागराज स्थित एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया।

जानकारी के अनुसार हनुमान का पुरवा निवासी रामबाबू (45) अपनी पत्नी कुसुम और बच्चों देवांशी (7) व दिव्यांशु (5) के साथ घर में सो रहे थे। सोमवार रात करीब तीन बजे घर के पीछे स्थित रामभूलन की कच्ची मिट्टी की दीवार लगातार हो रही बारिश के कारण अचानक ढह गई। दीवार गिरने से रामबाबू के पक्के मकान की पिछली बाउंड्री भी उसकी चपेट में आकर गिर गई। अचानक हुए हादसे में रामबाबू, उनकी पत्नी और दोनों बच्चे मलबे में दब गए।

दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने बिना देर किए मलबा हटाने का काम शुरू किया और रात में ही चारों लोगों को बाहर निकाल लिया। इसके बाद सभी घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने देवांशी की हालत गंभीर देखते हुए उसे प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों का जिला अस्पताल में उपचार किया गया।

सूचना में देरी पर लेखपाल निलंबित

घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार से जानकारी ली तथा राहत एवं उपचार की स्थिति देखी। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

वहीं, घटना की सूचना समय पर प्रशासन को नहीं दिए जाने और लापरवाही के आरोप में क्षेत्रीय लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा। ग्रामीणों ने बारिश के मौसम में जर्जर मकानों और कच्ची दीवारों को लेकर प्रशासन से सतर्कता बरतने की मांग की है।

ई-रिक्शा की बैटरियां चोरी करने वाला आरोपी 24 घंटे में गिरफ्तार, तीन बैटरियां बरामद

सर्विलांस सेल की मदद से मानिकपुर पुलिस की कार्रवाई, दरोगा अमित कुमार सिंह की सक्रियता की हो रही सराहना

प्रतापगढ़। मानिकपुर थाना पुलिस ने सर्विलांस सेल के सहयोग से ई-रिक्शा की बैटरियां चोरी करने की घटना का महज 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी की तीन ई-रिक्शा बैटरियां भी बरामद की हैं। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई में उपनिरीक्षक अमित कुमार सिंह की सक्रिय भूमिका रही, जिनकी लगातार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पुलिस महकमे में सराहना हो रही है।

पुलिस के अनुसार, ई-रिक्शा की बैटरियां चोरी होने के मामले में वादी की तहरीर पर थाना मानिकपुर में मुकदमा अपराध संख्या 221/2026 धारा 303(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने चोरी के खुलासे और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जांच शुरू की। सर्विलांस सेल की मदद से पुलिस टीम ने संदिग्धों के संबंध में जानकारी जुटाई और लगातार दबिश व तलाश की।

इसी क्रम में 30 अगस्त को थाना मानिकपुर पुलिस ने शाहाबाद मुर्गी फार्म जाने वाले कच्चे रास्ते के पास से सोनू सोनकर पुत्र रामबाबू सोनकर, निवासी ममरखापुर मिरगढवा, थाना मानिकपुर, उम्र करीब 24 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की तीन ई-रिक्शा बैटरियां बरामद कीं। बरामद बैटरियां ईस्टमैन कंपनी की नीले-पीले रंग की बताई गई हैं।

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने साथी रोहन कुमार के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई थी। दोनों कथित तौर पर वादी के लाल रंग के ई-रिक्शा को बाग में ले गए और उसकी बैटरियां निकालकर चोरी कर ली थीं। बरामदगी और विवेचना के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) और 3(5) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं। उसके आपराधिक इतिहास में आर्म्स एक्ट, चोरी, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं के मामले शामिल हैं। आरोपी की आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 147A भी खोली गई है।

इस पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई की। घटना के बाद लगातार सुराग जुटाने, आरोपी तक पहुंचने और चोरी की संपत्ति बरामद करने में टीम की सक्रियता नजर आई। स्थानीय स्तर पर दरोगा अमित सिंह की अपराध नियंत्रण को लेकर लगातार सक्रियता और त्वरित कार्रवाई की चर्चा हो रही है।

कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी बृजनन्दन राय और क्षेत्राधिकारी कुण्डा शिव नारायन वैस के पर्यवेक्षण में की गई। टीम में उपनिरीक्षक अमित कुमार सिंह के साथ कांस्टेबल रामदेव गौतम, भीमराव, दर्वेश कुमार, आर्यन कुमार, अमन यादव और महिला कांस्टेबल निधि यादव शामिल रहीं।

पुलिसकर्मी पर कार चढ़ाकर जान से मारने का प्रयास! सरकारी वाहन में मारी टक्कर, देल्हूपुर पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

प्रतापगढ़। देल्हूपुर थाना क्षेत्र में डायल-112 पीआरवी कर्मियों के साथ अभद्रता और पुलिसकर्मी को कार से कुचलने के प्रयास के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त अल्टो कार संख्या UP72AH3668 भी बरामद की है।

पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त 2026 को डायल-112 पीआरवी संख्या 8880 पर इवेंट संख्या 15059 प्राप्त हुई थी। स्टेशन मोड़ के पास मारपीट और जान से मारने की धमकी की सूचना पर पीआरवी कर्मी मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान अल्टो कार सवार शिवमंगल सिंह और राहुल सिंह ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता शुरू कर दी।

आरोप है कि इसी दौरान राहुल सिंह ने तेज रफ्तार अल्टो कार पुलिसकर्मी की ओर मोड़कर उसे कुचलने का प्रयास किया। पुलिसकर्मी ने किसी तरह अपनी जान बचाई। इसके बाद आरोपियों ने सरकारी स्कॉर्पियो पीआरवी वाहन में टक्कर मार दी, जिससे वाहन का अगला बायां दरवाजा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद दोनों आरोपी कार लेकर मौके से फरार हो गए।

मामले में तहरीर के आधार पर थाना देल्हूपुर में मु0अ0सं0 141/2026, धारा 109(1)/352/324(4)/132 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

दोनों आरोपी गिरफ्तार, कार बरामद

पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ श्री दीपक भूकर के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) श्री आलोक कुमार तथा सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी रानीगंज श्री प्रशान्त राज के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी देल्हूपुर श्री राधेश्याम के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की।

पुलिस ने शिवमंगल सिंह (46 वर्ष), निवासी ग्राम भावलपुर, थाना देल्हूपुर और राहुल सिंह (41 वर्ष), निवासी ग्राम भावलपुर, थाना देल्हूपुर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त अल्टो कार UP72AH3668 भी बरामद की।

दोनों के खिलाफ पहले से भी मुकदमे

पुलिस के अनुसार, शिवमंगल सिंह के विरुद्ध मारपीट, तोड़फोड़, गाली-गलौज और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में पूर्व के कई मुकदमे दर्ज हैं। वहीं राहुल सिंह के विरुद्ध भी धोखाधड़ी, मारपीट, धमकी और अन्य धाराओं में पूर्व के अभियोग दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

इन पुलिसकर्मियों ने की गिरफ्तारी

गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक तुलसी राम, कांस्टेबल दीपांशु शुक्ला, उपनिरीक्षक राधेश्याम यादव, उपनिरीक्षक शिवा प्रजापति, कांस्टेबल उपेन्द्र कुमार एवं रिजर्व कांस्टेबल शुभम भास्कर शामिल रहे।

देल्हूपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पुलिसकर्मी को कुचलने के प्रयास और सरकारी वाहन में टक्कर के मामले में दोनों आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं।

मोबाइल की किस्त के विवाद में मारपीट और जातिसूचक गाली-गलौज का आरोप, पीड़ित ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग

प्रतापगढ़। थाना कंधई क्षेत्र में मोबाइल की किस्त के विवाद को लेकर मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और मोबाइल फोन क्षतिग्रस्त करने का मामला सामने आया है। मामले में पवन कुमार सरोज पुत्र स्वर्गीय गजानंद सरोज, निवासी भगेसरा पृथ्वीगंज थाना कोतवाली देहात, जनपद प्रतापगढ़ ने थाना प्रभारी कंधई को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक वह वर्तमान में बजाज फाइनेंस लिमिटेड में कार्यरत है। आरोप है कि 30 अगस्त 2026 को करीब दोपहर 12 बजे वह कंधई थाना क्षेत्र स्थित एक व्यक्ति के घर पर मोबाइल की किस्त के संबंध में बातचीत करने गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित व्यक्ति का बजाज फाइनेंस में मोबाइल से जुड़ा लोन चल रहा है।

पीड़ित का आरोप है कि इसी दौरान संबंधित व्यक्ति के भाई समेत लगभग पांच अज्ञात लोगों ने उसे घेर लिया। आरोपियों ने उसके साथ विवाद शुरू कर दिया और कथित तौर पर जातिसूचक गालियां देते हुए मारपीट की।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया और उसी मोबाइल से उसके सिर पर कई बार वार किया, जिससे उसे चोटें आईं। मारपीट के दौरान उसका मोबाइल भी क्षतिग्रस्त हो गया।

घटना के बाद पीड़ित ने तत्काल डायल-112 पर सूचना दी। शिकायत के अनुसार पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही आरोपी वहां से फरार हो गए। पीड़ित ने बताया कि घटना के समय मौके पर संबंधित व्यक्ति के माता-पिता, भाई और आसपास के कई लोग मौजूद थे।

शिकायतकर्ता ने थाना प्रभारी कंधई से मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने, मेडिकल परीक्षण कराने तथा मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

नोट: यह खबर शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

फायरिंग कांड में वांछित साहबे आलम उर्फ साहिल गिरफ्तार, तमंचा-कारतूस बरामद

प्रतापगढ़/दिलीपपुर पुलिस ने 21 अगस्त को हुई फायरिंग व मारपीट के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मुकदमे में वांछित चल रहे एक आरोपी साहबे आलम उर्फ साहिल (26) को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से 315 बोर का तमंचा और एक जिंदा कारतूस भी बरामद हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी मुकदमेबाजी की रंजिश को लेकर मो. सादाब को स्विफ्ट कार से ओवरटेक कर रोकने के बाद फायरिंग और लाठी-डंडों से मारपीट कर घायल करने का आरोप है। घायल सादाब को डायल-112 की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया गया था। मामले में 21 अगस्त 2026 को थाना दिलीपपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था।

इसी मामले में वांछित आरोपियों की तलाश के दौरान 30 अगस्त को मुखबिर की सूचना पर बाबा बेलखरनाथ धाम पुल के पास नजियापुर की तरफ बाग से पुलिस ने साहबे आलम उर्फ साहिल पुत्र निजाम, निवासी पतुलकी, थाना अन्तू को गिरफ्तार किया।

🔴 पूछताछ में फायरिंग की बात बताई

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने घटना में शामिल होना बताया। उसके कथन के अनुसार वह अन्य आरोपियों के साथ स्विफ्ट कार से सादाब का पीछा कर रहा था और घटना के दौरान उसी ने तमंचे से फायर किया था।

तमंचा और कारतूस बरामद होने के बाद मुकदमे में धारा 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी की गई है।

📋 पहले से भी दर्ज हैं कई मुकदमे

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी साहबे आलम उर्फ साहिल के खिलाफ थाना अन्तू, थाना देल्हूपुर और थाना दिलीपपुर में वर्ष 2022 से 2026 तक कुल 4 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2022 के मुकदमे में धारा 307 भादवि तथा वर्ष 2026 के एक मामले में आर्म्स एक्ट की धाराएं भी शामिल हैं।

👮 पुलिस टीम

यह कार्रवाई एसपी प्रतापगढ़ दीपक भूकर के निर्देशन में, एएसपी पूर्वी आलोक कुमार एवं क्षेत्राधिकारी पट्टी प्रदीप सिंह के पर्यवेक्षण में थाना दिलीपपुर प्रभारी निरीक्षक विजयकान्त सत्यार्थी के नेतृत्व में की गई।

गिरफ्तारी करने वाली टीम में उ0नि0 देवेन्द्र कुमार पाठक, का0 आशीष, का0 लक्ष्मण एवं रि0का0 गौरव शामिल रहे।

बरामदगी:
🔹 01 तमंचा 315 बोर
🔹 01 जिंदा कारतूस 315