महाराष्ट्र पुलिस के इनपुट पर बड़ी कार्रवाई, अंडावा चौराहे के पास से गिरफ्तारी; 1.05 लाख रुपये नकद, आई-10 कार और पांच मोबाइल बरामद
प्रयागराज। महाराष्ट्र के ठाणे ग्रामीण जिले में मुंबई-आगरा हाईवे पर हुई 61.50 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के मामले में उत्तर प्रदेश STF की प्रयागराज फील्ड यूनिट को बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर STF ने कार्रवाई करते हुए लूटकांड में वांछित चल रहे तीन आरोपियों को प्रयागराज से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल सिंह, बीरबल पटेल और नरेश गिरी के रूप में हुई है। तीनों के खिलाफ महाराष्ट्र के शाहापुर थाने में मुकदमा दर्ज बताया गया है।
STF की कार्रवाई के बाद इस बड़े लूटकांड की जांच में नया मोड़ आ गया है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर लूट की रकम के बंटवारे, गिरोह के अन्य सदस्यों और वारदात में इस्तेमाल संसाधनों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
मुंबई-आगरा हाईवे पर 23/24 अगस्त की रात हुई थी वारदात
STF के मुताबिक, 23/24 अगस्त 2026 की रात महाराष्ट्र के ठाणे ग्रामीण जिले के शाहापुर थाना क्षेत्र में मुंबई-आगरा हाईवे पर लूट की वारदात को अंजाम दिया गया था। आरोप है कि अनिल सिंह, बीरबल पटेल और नरेश गिरी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर गोविंद की बोलेरो गाड़ी को निशाना बनाया और उसमें रखे 61.50 लाख रुपये लूट लिए।
इतनी बड़ी रकम की लूट के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। घटना में शामिल आरोपियों की तलाश के दौरान पुलिस को उनके उत्तर प्रदेश में होने की जानकारी मिली। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने यूपी STF से संपर्क कर आरोपियों की गिरफ्तारी में सहयोग मांगा।
महाराष्ट्र पुलिस के इनपुट पर STF ने बिछाया जाल
महाराष्ट्र पुलिस से जानकारी मिलने के बाद यूपी STF की प्रयागराज फील्ड यूनिट सक्रिय हुई। आरोपियों की गतिविधियों और संभावित ठिकानों पर निगरानी शुरू की गई। STF ने तकनीकी और स्थानीय इनपुट के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास किया।
पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण और निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में STF टीम ने लगातार निगरानी की। जांच के दौरान आरोपियों की मौजूदगी प्रयागराज के सराय इनायत थाना क्षेत्र में सामने आई।
STF को जब आरोपियों के एक स्थान पर पहुंचने की पुख्ता जानकारी मिली तो महाराष्ट्र पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई की योजना तैयार की गई।
अंडावा चौराहे के पास भोजनालय से तीनों गिरफ्तार
2 सितंबर 2026 को दोपहर करीब एक बजे यूपी STF और महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त टीम ने वाराणसी-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंडावा चौराहे के पास एक भोजनालय के निकट घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
अचानक हुई कार्रवाई से आरोपियों को संभलने का मौका नहीं मिला। पुलिस ने मौके से अनिल सिंह, बीरबल पटेल और नरेश गिरी को हिरासत में लिया।
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.05 लाख रुपये नकद, एक आई-10 कार और पांच मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद नकदी को महाराष्ट्र में हुई लूट की रकम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, बरामद धनराशि की वास्तविक भूमिका और उसके स्रोत को लेकर आगे की जांच महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की जाएगी।
पूछताछ में लूट गिरोह से जुड़े होने की बात सामने आई
STF के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने खुद को एक सक्रिय लूट गिरोह का हिस्सा बताया है। पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी भी सामने आई कि लूट की रकम को वारदात में शामिल गिरोह के सदस्यों के बीच बांटा गया था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 61.50 लाख रुपये की पूरी रकम किस तरह बांटी गई, कितनी रकम किन आरोपियों तक पहुंची और लूट की शेष रकम कहां है।
इसके साथ ही जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह ने इससे पहले कितनी वारदातों को अंजाम दिया है और महाराष्ट्र के अलावा दूसरे राज्यों में भी इसके सदस्यों की सक्रियता थी या नहीं।
गुजरात में रह रहे थे आरोपी, एक का प्रतापगढ़ से संबंध
गिरफ्तार तीनों आरोपियों के संबंध गुजरात से बताए जा रहे हैं। STF के अनुसार अनिल सिंह गुजरात के सूरत में रह रहा था, जबकि उसका मूल निवास प्रतापगढ़ बताया गया है।
वहीं बीरबल पटेल अहमदाबाद और नरेश गिरी मेहसाणा, गुजरात का रहने वाला बताया गया है।
महाराष्ट्र में वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों के उत्तर प्रदेश पहुंचने और अलग-अलग स्थानों पर रहने की जानकारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी प्रयागराज क्यों आए थे और क्या यहां भी गिरोह के अन्य सदस्यों से उनकी मुलाकात या संपर्क हुआ था।
पूछताछ में महाराष्ट्र पुलिस के SI का नाम आने से जांच में नया मोड़
इस मामले में पूछताछ के दौरान एक और गंभीर दावा सामने आया है। STF के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया कि उनके गिरोह में महाराष्ट्र के ठाणे ग्रामीण जिले के कसर थाना क्षेत्र से संबंधित SI राजेश सविता भी शामिल था।
आरोपियों ने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि उक्त पुलिसकर्मी और अन्य साथियों के सहयोग से लूट की घटनाओं को अंजाम दिया गया।
हालांकि, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि पुलिसकर्मी की कथित भूमिका फिलहाल केवल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में सामने आए दावे तक सीमित है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित पुलिसकर्मी की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि जांच में आरोपियों के इस दावे की पुष्टि होती है तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा इस बिंदु पर भी विस्तृत जांच किए जाने की संभावना है।
पांच मोबाइल फोन भी बरामद, डिजिटल कड़ियां खंगालेगी पुलिस
गिरफ्तारी के दौरान पांच मोबाइल फोन बरामद होना भी जांच में अहम माना जा रहा है। पुलिस इन मोबाइल फोन से आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों, कॉल डिटेल, आपसी बातचीत और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि लूट की वारदात से पहले आरोपियों के बीच किस तरह संपर्क हुआ था और घटना के बाद वे किन लोगों के संपर्क में थे।
आई-10 कार के संबंध में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है कि उसका इस्तेमाल लूटकांड के दौरान किया गया था या गिरफ्तारी के समय आरोपी उसमें मौजूद थे।
सराय इनायत थाने में दाखिल कराए गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को सराय इनायत थाने में दाखिल कराया गया। चूंकि मामला महाराष्ट्र के शाहापुर थाने में दर्ज है, इसलिए आगे की कानूनी कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की जा रही है।
महाराष्ट्र पुलिस आरोपियों को सीजेएम प्रयागराज की अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लेने की कार्रवाई में जुटी है। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपियों को महाराष्ट्र ले जाया जाएगा, जहां शाहापुर थाना पुलिस उनसे लूटकांड के संबंध में विस्तृत पूछताछ करेगी।
महाराष्ट्र ले जाने के बाद पुलिस वारदात में आरोपियों की वास्तविक भूमिका, लूट की रकम, गिरोह के अन्य सदस्यों और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों के बारे में जानकारी जुटाएगी।
अब गिरोह के बाकी सदस्यों पर नजर
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का अगला फोकस गिरोह के अन्य सदस्यों पर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लूट की वारदात में कुल कितने लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका थी।
साथ ही लूटी गई 61.50 लाख रुपये की रकम में से कितनी धनराशि बरामद हो चुकी है और शेष रकम कहां है, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
पुलिस आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और दूसरे राज्यों में दर्ज मामलों की जानकारी भी जुटा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि गिरफ्तार तीनों आरोपी केवल महाराष्ट्र की इस वारदात तक सीमित थे या किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं।
बड़ी रकम की लूट से शुरू हुई जांच, प्रयागराज में गिरफ्तारी तक पहुंचा मामला
महाराष्ट्र में हाईवे पर लाखों रुपये की लूट से शुरू हुई जांच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी है। 61.50 लाख रुपये की लूट के मामले में तीन वांछित आरोपियों की प्रयागराज से गिरफ्तारी ने जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल भी खड़े किए हैं।
STF की कार्रवाई में नकदी, कार और मोबाइल फोन की बरामदगी हुई है, जबकि पूछताछ में सामने आए कथित बयानों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच की दिशा भी खुली है।
अब महाराष्ट्र पुलिस की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि हाईवे पर हुई इस बड़ी लूट की पूरी साजिश कैसे रची गई, लूटी गई रकम का कितना हिस्सा आरोपियों के पास पहुंचा और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।
रुबरु इंडिया न्यूज







