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प्रतापगढ़। मौका था रानीगंज के के बभनमाई में राष्ट्रीय काव्य महोत्सव
एक शाम … सुशासन के नाम
एवं स्व प्रेमचंद ओझा एवं साधना ओझा की पुण्य स्मृति होली सामाजिक एकता एवं विकास को समर्पित

वह मुझे अपना तरफदार समझ लेता है, मेरी खामोशी को इकरार समझ लेता है..। देश की मशहूर शायरा शाइस्ता सना ने यह पढ़ी तो पूरा मजमा वाह-वाह कर उठा। कई नामी-गिरामी कवियों व शायरों ने अपने आवाज़ के जलवे बिखेरे । मौसम के बीच में खराब होने के बाद भी लोगों ने पूरा आनंद लिया व रात भर कविताएं सुनने को जमे रहे।

हास्य कवि पद्मश्री डा. सुनील जोगी ने पढ़ा चाहत के समंदर में उतरने नहीं दूंगा, महबूब की गलियों से गुजरने नहीं दूंगा, एक रोमियो से योगी जी ने बात ये कही, जो मैंने न किया तुम्हे करने नहीं दूंगा । सपना सोनी की पंक्तियां मुझे संसद में बिठा दे रे ओ सैंया दीवाने, तुम्हें पीए मैं बना लूं रे ओ सैंया दीवाने।डा. राजीव राज ने गीत से वाहवाही लूटी..उमरिया एक सड़क वीरान, कहां है मंजिल किसको ज्ञान। पवन आगरी, आशीष अनल के बाद हाशिम फिरोजाबादी ने महफिल में रवानी डाली। उन्होंने देश प्रेम का संचार करते हुए सुनाया..जिनके हाथों से तिरंगा न संभाला जाए, ऐसे नेताओं को संसद से निकाला जाए..।

इस अवसर पर संयोजक गजलकार डा. नागेंद्र अनुज ने पढ़ा तीर भाले नहीं चाहिए, घर जलाकर उजाले नहीं चाहिए। देश मेरा सलामत रहे दोस्तों, मुझको मस्जिद शिवाले नहीं चाहिए..। संचालन मैनपुरी के सतीश मधुप ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रानीगंज के विधायक अभय कुमार धीरज ओझा ने कहा कि रानीगंज साहित्य व धर्म की उर्वरा धरती है। यहां कवि डा. हरिवंश राय बच्चन जन्मे और गोस्वामी तुलसी दास की राजापुर जन्मस्थली है

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