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प्रयागराज/प्रतापगढ़।न्याय की डगर लंबी जरूर रही, लेकिन आखिरकार सच की जीत हुई। 24 साल पुराने एक चर्चित मुकदमे में आज अदालत ने तीनों आरोपियों — सईद, रऊफ और वकील — को दोषमुक्त करार दिया। मामला वर्ष 2001 में थाना लालगंज, जनपद प्रतापगढ़ में दर्ज हुआ था, जिसमें SC/ST एक्ट, मारपीट, छेड़खानी और गाली-गलौज जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा कायम किया गया था।

इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (SC/ST कोर्ट) में चल रही थी, जहां वर्षों से दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे थे। लम्बे विचार-विमर्श और गवाहियों के बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।

मुकदमे का शीर्षक सरकार बनाम रऊफ था, जिसमें सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजन अधिकारी ने पैरवी की, जबकि आरोपियों की ओर से अधिवक्ताओं की मजबूत दलीलों ने अदालत को प्रभावित किया।
मुलजिमों की तरफ से अधिवक्ता मोहम्मद नफीस, मोहम्मद उस्मान सिद्दीकी और जुबैर ने मुकदमे की पैरवी की। उन्होंने अदालत में यह साबित किया कि आरोप झूठे और मनगढंत थे, तथा उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा, इसलिए सईद, रऊफ और वकील को सभी धाराओं से दोषमुक्त किया जाता है।

लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे तीनों अभियुक्तों के लिए यह फैसला राहत भरा साबित हुआ। 24 वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने और सामाजिक दबाव झेलने के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला।

फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर खुशी का माहौल देखने को मिला। बरी हुए सईद, रऊफ और वकील का स्वागत फूल-मालाओं से किया गया। परिजनों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी। तीनों ने अपने अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “न्याय व्यवस्था पर हमारा विश्वास और मजबूत हुआ है। सत्य की जीत हुई है, और 24 साल की पीड़ा का अंत आखिर आज हुआ।”

अधिवक्ता मोहम्मद नफीस ने कहा कि यह फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता और सबूत-आधारित न्याय प्रक्रिया की मिसाल है। उन्होंने बताया कि मुकदमे में लगाए गए सभी आरोप झूठे साबित हुए और अदालत ने विधि सम्मत तरीके से तीनों को पूर्णत: बरी किया।

स्थानीय स्तर पर यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि 24 साल तक चले इस मुकदमे में आखिरकार सच की जीत हुई, हालांकि इतनी लंबी अवधि तक मुकदमे का चलना न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति पर भी सवाल उठाता है।

फिलहाल अदालत के इस आदेश के बाद सईद, रऊफ और वकील ने सामान्य जीवन में लौटने की राहत महसूस की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके लिए नए जीवन की शुरुआत जैसा है।


रिपोर्ट — RubaruIndia / EbrarAhmad

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