प्रतापगढ़, रानीगंज। रानीगंज तहसील में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के खिलाफ पिछले पांच दिनों से चल रहे अधिवक्ताओं के आंदोलन ने अब प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ता संघ लगातार क्रमिक अनशन और विरोध प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद तहसील दिवस के अवसर पर एसडीएम की मौजूदगी ने विवाद को और अधिक बढ़ा दिया।


शनिवार को आयोजित तहसील दिवस के दौरान जब एसडीएम जनसुनवाई के लिए गांधी सभागार पहुंचे तो पहले से आंदोलनरत अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता धरना स्थल से निकलकर सभागार पहुंच एसडीएम के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। “एसडीएम मुर्दाबाद”, “सभागार से बाहर जाओ” जैसे नारों से पूरा सभागार गूंज उठा। अधिवक्ताओं ने वहीं सभागार के भीतर धरना देकर विरोध जताना शुरू कर दिया और सभागार में फर्श पर बैठ गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अंततः एसडीएम को सभागार छोड़कर वापस लौटना पड़ा।


स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने माहौल शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन अधिवक्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। बढ़ते विरोध और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए अंततः एसडीएम को सभागार छोड़कर बाहर निकलना पड़ा। इसके बाद वे सीधे जिला मुख्यालय के लिए रवाना हो गए।
एसडीएम के जाने के बाद समाधान दिवस की कार्यवाही तहसीलदार की अध्यक्षता में आगे बढ़ाई गई और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई।


अधिवक्ताओं का कहना है कि जब उनके द्वारा एसडीएम के खिलाफ लगातार धरना-प्रदर्शन और न्यायिक कार्य बहिष्कार किया जा रहा है, तो प्रशासन को स्थिति की गंभीरता समझनी चाहिए थी। इसके बावजूद तहसील दिवस में उन्हें भेजा जाना अधिवक्ताओं को उकसाने जैसा कदम माना जा रहा है।
धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर जिला प्रशासन अधिवक्ताओं की मांगों को नजरअंदाज क्यों कर रहा है? पिछले पांच दिनों से आंदोलन जारी है, कई बार ज्ञापन दिए गए, न्यायिक कार्य ठप पड़ा है, फिर भी कोई ठोस पहल क्यों नहीं की गई?


अधिवक्ता संघ के सदस्यों का कहना है कि प्रशासन की ओर से संवाद स्थापित करने के बजाय वही अधिकारी जनसुनवाई के लिए भेजे जा रहे हैं जिनके खिलाफ आंदोलन चल रहा है। इससे स्थिति और बिगड़ रही है।
इस घटनाक्रम के बाद कई सवाल अब खुलकर सामने आने लगे हैं—
क्या जिला प्रशासन आंदोलन की गंभीरता को समझ नहीं पा रहा?
क्या अधिवक्ताओं की मांगों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है?
जब एसडीएम के खिलाफ धरना चल रहा था तो फिर तहसील दिवस में जनसुनवाई के लिए उन्हें क्यों भेजा गया?


क्या प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी है या फिर इस विवाद को हल करने की इच्छा ही नहीं दिखाई जा रही?
अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का समाधान निकाल लिया जाता तो जनसुनवाई बाधित नहीं होती और आम जनता को भी परेशानी नहीं उठानी पड़ती। कई फरियादी दूर-दराज से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे थे, लेकिन विरोध के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा।

पांचवें दिन भी अधिवक्ता संघ का क्रमिक अनशन जारी रहा और आंदोलन ने और अधिक उग्र रूप ले लिया। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक एसडीएम का तबादला नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


गांधी सभागार में विरोध दर्ज कराने के बाद अधिवक्ता संघ पुनः तहसील गेट नंबर-1 स्थित धरना स्थल पर लौट आया और क्रमिक अनशन को आगे जारी रखा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एसडीएम के व्यवहार और कार्यप्रणाली से अधिवक्ता समाज लंबे समय से नाराज है और कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।


इस बीच आंदोलन को समर्थन देने के लिए जिला मुख्यालय से भी बड़ी संख्या में अधिवक्ता रानीगंज तहसील पहुंचे और स्थानीय अधिवक्ताओं के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि यह केवल रानीगंज तहसील का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे अधिवक्ता समाज के सम्मान का प्रश्न है।
धरना स्थल पर मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले का समाधान नहीं निकाला तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी। वहीं जूनियर अधिवक्ताओं में भी भारी आक्रोश देखने को मिला और उन्होंने भी आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया।


फिलहाल स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि एसडीएम के स्थानांतरण के संबंध में क्या निर्णय लिया जाएगा। दूसरी ओर अधिवक्ता समाज अपने आंदोलन को निर्णायक चरण तक ले जाने के संकेत दे रहा है। अधिवक्ताओं का कहना एसडीम के ट्रान्सफर के बाद ही इसका हल निकले गा


रानीगंज तहसील में बढ़ते इस विवाद ने प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि कोई समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल अधिवक्ताओं का क्रमिक अनशन जारी है और सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेंद्र प्रताप सिंह, शैलेष पांडेय, बीरेंद्र मिश्रा, हम्पी,सोनू,वसीम अहमद,प्रमोद मिश्रा,आदि सहित सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता रहे।

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