आज जब समाज को अक्सर धर्म और जाति के नाम पर बांटने की कोशिशें सुर्खियां बनती हैं, ऐसे समय में रानीगंज की यह घटना इंसानियत की सबसे खूबसूरत तस्वीर पेश करती है। यहां एक हिंदू युवक ने बिना एक पल सोचे अपनी जान जोखिम में डालकर एक मुस्लिम महिला की जिंदगी बचा ली। उस क्षण न कोई धर्म था, न कोई भेदभाव—सिर्फ एक इंसान दूसरे इंसान की जान बचाने के लिए दौड़ पड़ा।


यह घटना बताती है कि असली पहचान इंसानियत है, जो हर मजहब से ऊपर है। जब एक तरफ नफरत की खबरें माहौल को बोझिल करती हैं, वहीं ऐसे साहसी और संवेदनशील लोग उम्मीद जगाते हैं कि समाज अभी भी प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों से जीवित है।


शनि पाण्डेय जैसे युवाओं का साहस यह संदेश देता है कि संकट के समय इंसान का धर्म सिर्फ इंसानियत होना चाहिए, क्योंकि जान बचाने वाला हाथ कभी मजहब नहीं पूछता। यही वह तस्वीर है, जो आज के दौर में समाज को जोड़ने और उम्मीद जगाने का काम करती

घरेलू कलह से परेशान विवाहिता ने ट्रेन से कटकर आत्महत्या का किया प्रयास, युवक की बहादुरी से बची जान


प्रतापगढ़। जनपद के रानीगंज थाना क्षेत्र में घरेलू कलह से परेशान एक विवाहिता ने रविवार दोपहर ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर मौजूद एक युवक की सतर्कता और बहादुरी से उसकी जान बच गई। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।


जानकारी के अनुसार रानीगंज थाना क्षेत्र के थाहीपुर गांव की निवासी एक महिला (35 वर्ष), रविवार दोपहर लगभग 3:30 बजे लखनऊ-वाराणसी रेलमार्ग पर स्थित मां बाराही देवी धाम रेलवे फाटक के पास पहुंच गईं। महिला अपने साथ 18 महीने की मासूम बच्ची को भी लेकर आई थी। बच्ची को रेलवे ट्रैक के किनारे रखकर वह खुद पटरी पर जाकर ट्रेन से कटकर जान देने की कोशिश करने लगीं।


उसी समय प्रतापगढ़ की ओर से एक मालगाड़ी आ रही थी। तभी पचरास गांव निवासी शनि पाण्डेय की नजर महिला पर पड़ी। स्थिति को गंभीर समझते हुए युवक ने अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़ लगाकर महिला को पटरी से खींच लिया। कुछ ही क्षण बाद मालगाड़ी वहां से गुजर गई और एक बड़ा हादसा टल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने युवक की बहादुरी की जमकर सराहना की।


सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिला से पूछताछ की। इस दौरान महिला ने बताया कि उसकी शादी वर्ष 2016 में आमिर निवासी थाहीपुर से हुई थी और उसके चार बच्चे हैं। उसका मायका रानीगंज थाना क्षेत्र के दुर्गागंज जयरामपुर में है। महिला का आरोप है कि शादी के बाद से ही पति द्वारा मारपीट और गाली-गलौज की जाती रही, जबकि घर के अन्य लोग भी उसे ताने देते रहते थे, जिससे वह काफी परेशान थी।


घटना की जानकारी मिलने पर महिला के पिता भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बेटी को समझाया और शांत कराया। काफी देर तक समझाने के बाद पिता उसके साथ मौजूद था  जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।


स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर समय रहते युवक शनि पाण्डेय साहस नहीं दिखाते तो बड़ा हादसा हो सकता था। लोगों ने उनकी सराहना करते हुए ऐसे युवाओं को सम्मानित किए जाने की मांग की है। वहीं पुलिस पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की बात कह रही है।

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