प्रतापगढ़। जनपद के देल्हूपुर थाना क्षेत्र में बीते दिनों हुई कथित हाईवे लूट की घटना का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए पूरे मामले की सच्चाई सामने ला दी है। जिस वारदात को पहले संगठित लूट समझा जा रहा था, वह दरअसल खुद ज्वैलर्स व्यापारी द्वारा रची गई साजिश निकली। पुलिस की गहन जांच, तकनीकी निगरानी और लगातार की गई कार्रवाई के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी अभी फरार है जिसकी तलाश जारी है।
इस खुलासे के बाद इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है कि किस तरह कर्ज और आर्थिक दबाव से बचने के लिए व्यापारी ने अपने ही साथियों के साथ मिलकर लूट का ड्रामा रचा और पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया। लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और पुलिस की सतर्कता ने इस झूठी कहानी का पर्दाफाश कर दिया।
घटना ने पूरे इलाके को चौंका दिया था।6 फरवरी 2026 को अमेठी जिले के रामगंज बाजार निवासी एक ज्वैलर्स व्यापारी अपने साथी कारीगर के साथ प्रयागराज से खरीदारी कर टाटा पंच कार से वापस लौट रहा था। व्यापारी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि देल्हूपुर थाना क्षेत्र के गज़ेहड़ा जंगल के पास बाइक सवार तीन बदमाशों ने उसकी कार को रोक लिया और तमंचा दिखाकर बैग लूटकर फरार हो गए।
बताया गया कि बैग में करीब 9 लाख 60 हजार रुपये नकद और लगभग 3 किलो चांदी रखी हुई थी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामला गंभीर मानते हुए मुकदमा दर्ज किया गया।घटना की खबर फैलते ही व्यापारियों और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी। लोगों को लगा कि हाईवे पर बदमाशों का गिरोह सक्रिय हो गया है।
पुलिस ने तुरंत शुरू की जांच।मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कई पुलिस टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, मोबाइल सर्विलांस का सहारा लिया और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की।
शुरुआती जांच में पुलिस को कई बातें संदिग्ध लगीं। घटनास्थल पर संघर्ष या जबरन रोकने के पर्याप्त संकेत नहीं मिले। इसके अलावा व्यापारी की बताई कहानी और तकनीकी डेटा में भी कई विरोधाभास सामने आए।यहीं से पुलिस को शक हुआ कि मामला वैसा नहीं है जैसा बताया जा रहा है।
तकनीकी जांच ने खोला सारा खेल
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और रास्ते की सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से अध्ययन किया। इससे पता चला कि व्यापारी की गतिविधियां संदिग्ध थीं और कुछ संदिग्ध नंबरों से लगातार संपर्क बना हुआ था।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि कथित लूट से पहले व्यापारी कुछ लोगों से मिला था और उसी के बाद घटना घटी। पुलिस ने इन लोगों पर निगरानी बढ़ाई और जल्द ही साजिश की परतें खुलने लगीं।
तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं—
रितेश मौर्य (व्यापारी)
अवनीश तिवारी उर्फ आयुष
अनुज दुबे
जबकि चौथा आरोपी केट्टन दुबे अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पूछताछ में सामने आई पूरी साजिश गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बताया गया कि व्यापारी रितेश मौर्य पर कई लोगों का कर्ज था और वह आर्थिक दबाव में था। कर्ज चुकाने और अन्य लेनदेन से बचने के लिए उसने लूट की झूठी कहानी गढ़ने की योजना बनाई।
इस योजना के तहत उसने अपने परिचित अनुज दुबे को साथ मिलाया और तय किया कि लौटते समय जंगल क्षेत्र में उसकी कार रोककर बैग लूट लिया जाएगा ताकि मामला वास्तविक लगे।
पहले से तय किए गए थे संकेत । पूछताछ में पता चला कि योजना के तहत व्यापारी ने अपने साथियों को संकेत भी बताए थे। कार की लाइट जलाने, स्पीड कम करने और एक निश्चित स्थान पर गाड़ी रोकने जैसे संकेत पहले से तय किए गए थे।
जैसे ही व्यापारी तय स्थान पर पहुंचा, साथी बाइक से आए और तमंचा दिखाकर बैग लेकर भाग गए। कुछ देर बाद व्यापारी ने पुलिस को सूचना देकर लूट की कहानी गढ़ दी।
बंटवारे से पहले ही पकड़े गए आरोपी । पुलिस पूछताछ में आरोपी अनुज दुबे ने बताया कि घटना के बाद व्यापारी ने उनसे संपर्क कम कर दिया। पैसे और चांदी का बंटवारा भी नहीं हो पाया था।लूट का पूरा सामान अनुज दुबे के पास ही रखा था, जहां से पुलिस ने बरामदगी कर ली।
क्या-क्या बरामद हुआ
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किया—
9 लाख 60 हजार रुपये नकद
3 किलो चांदी की सिल्ली
एक पिट्ठू बैग
अवैध 315 बोर तमंचा
दो जिंदा कारतूस
तीन मोबाइल फोन
घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल
टाटा पंच कार
वाहनों को भी जब्त कर लिया गया है।
संयुक्त टीम की भूमिका अहम रही
मामले के खुलासे में देल्हूपुर थाना पुलिस, स्वाट टीम, सर्विलांस सेल और स्पेशल टीम ने संयुक्त कार्रवाई की। तकनीकी जांच और लगातार दबिश ने अपराधियों को पकड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इलाके में फैली थी दहशत। घटना के बाद इलाके के व्यापारियों में डर का माहौल था। लोगों को लगा कि हाईवे पर लूटपाट की घटनाएं बढ़ रही हैं। लेकिन पुलिस के खुलासे के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
आरोपी पहले भी रहे हैं विवादों में । जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पूर्व में दर्ज मामलों की जानकारी भी सामने आई। कुछ आरोपियों पर पहले से मारपीट और अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस की जांच की हो रही सराहना
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने पुलिस की सक्रियता की सराहना की है। उनका कहना है कि अगर पुलिस ने तकनीकी जांच पर जोर न दिया होता तो यह मामला असली लूट मानकर फाइलों में दब जाता।
क्यों बढ़ रहे फर्जी अपराध? विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा क्लेम, कर्ज से बचने या आर्थिक दबाव के कारण कुछ लोग खुद अपराध की कहानी रचने लगे हैं। लेकिन ऐसे मामलों में सच्चाई सामने आने पर कानूनी कार्रवाई और भी सख्त हो जाती है।
पुलिस की चेतावनी पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि झूठी सूचना देकर पुलिस को गुमराह करना भी अपराध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फरार आरोपी की तलाश जारीमामले का चौथा आरोपी अभी फरार है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में लगी हुई हैं और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
व्यापारी समुदाय में चर्चा।घटना के बाद व्यापारियों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आर्थिक दबाव किस हद तक लोगों को गलत कदम उठाने पर मजबूर कर देता है।
तकनीकी पुलिसिंग का असरयह मामला भी साबित करता है कि अब अपराधों की जांच केवल बयान के आधार पर नहीं बल्कि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।कानून से बचना आसान नहींपुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे कितनी भी योजना बना लें, लेकिन जांच के दौरान सच्चाई सामने आ ही जाती है।
समाज के लिए भी एक सबक यह घटना समाज के लिए भी एक सीख है कि आर्थिक समस्याओं का समाधान अपराध या झूठ से नहीं बल्कि कानूनी और सामाजिक तरीकों से किया जाना चाहिए।देल्हूपुर की कथित लूट का खुलासा प्रतापगढ़ की हालिया घटनाओं में सबसे चौंकाने वाले मामलों में गिना जा रहा है। ज्वैलर्स द्वारा खुद रची गई लूट की कहानी ने पूरे जिले को हैरान कर दिया है। पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के कारण सच सामने आया और झूठी कहानी का अंत हो गया।
अब पुलिस फरार आरोपी की गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है। यह घटना अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश भी है कि कानून से बच पाना अब पहले जितना आसान नहीं रहा।







