प्रतापगढ़ जिले में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले जघन्य अपराध पर आखिरकार कानून ने सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सात साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए सत्यम पाल को पॉक्सो कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 1 लाख 40 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है, जिसकी पूरी राशि पीड़िता को प्रदान की जाएगी। यह फैसला अपर जनपद न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पारुल वर्मा की अदालत ने सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना 5 दिसंबर 2024 की है। पीड़िता अपनी सात साल की मासूम बच्ची के साथ रोजमर्रा का सामान खरीदने आरोपी सत्यम पाल की दुकान पर गई थी। दुकान के भीतर आरोपी की नीयत बिगड़ गई और उसने बच्ची को निशाना बनाते हुए उसके साथ हैवानियत शुरू कर दी। आरोपी ने मासूम के साथ बेरहमी से मारपीट की, अश्लील हरकतें कीं और दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची की चीख-पुकार से आसपास के लोग दहल उठे।
घटना के बाद पीड़िता की हालत बेहद गंभीर हो गई। मेडिकल जांच में उसके गुप्तांग में गंभीर चोटों की पुष्टि हुई, जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों ने तत्काल बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया और पूरे मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान अदालत के समक्ष रखे जिसके बाद अदालत ने जिसके बाद न्यायालय ने सजा सुनी सजा सुन पीड़ित के परिजनों ने कहा फांसी की सजा होनी चाहिए था वही दोषी सजा सुनने के बाद शांत दिखा
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान अदालत के समक्ष पेश किए। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक निर्भय सिंह ने प्रभावी ढंग से पैरवी करते हुए आरोपी के अपराध को न्यायालय के सामने रखा। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि पीड़िता को उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से नियमानुसार आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए, ताकि मासूम के इलाज और भविष्य में उसे सहारा मिल सके।
इस फैसले से न सिर्फ पीड़िता के परिवार को न्याय मिला है, बल्कि समाज को भी यह कड़ा संदेश गया है कि मासूम बच्चों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है।




