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एसडीएम रानीगंज के स्थानांतरण की मांग को लेकर तीसरे दिन भी जारी रहा अधिवक्ताओं का क्रमिक अनशन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


प्रतापगढ़। रानीगंज तहसील में तैनात उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के स्थानांतरण की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में क्रमिक अनशन और धरना जारी रखते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताई और स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।


गुरुवार को तहसील परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्रित हुए और एसडीएम के कार्य व्यवहार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र उर्फ पप्पू ने कहा कि रानीगंज तहसील का दुर्भाग्य है कि यहां तैनात अधिकारी को विधिक कार्यप्रणाली की समुचित जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएम द्वारा अधिवक्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता, जबकि अधिवक्ता न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।


उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी अधिवक्ताओं से संवाद स्थापित करते और विधिक प्रक्रिया को समझने का प्रयास करते तो स्थिति इतनी तनावपूर्ण न होती। और आरोप लगाया कि एसडीएम का रवैया न केवल अधिवक्ताओं बल्कि कर्मचारियों और आम जनता के प्रति भी कठोर और तानाशाहीपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि तहसील के कर्मचारी भी अधिकारी के व्यवहार से परेशान हैं, जिससे कार्यालय का कार्य वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।


धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने कहा कि तहसील में आने वाले आम नागरिकों को भी कई बार अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे जनता में भी असंतोष व्याप्त है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप और व्यवहारिक असहजता के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।


गुरुवार को स्थिति उस समय और गरमा गई जब अधिवक्ताओं के एक समूह ने, जिसकी अगुवाई अधिवक्ता  कमल दत्त और जेपी मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने की, जिला कलेक्ट्रेट में एसडीएम के न्यायालय का कामकाज रुकवा दिया। इसके बाद सभी अधिवक्ता न्यायालय कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए और स्थानांतरण की मांग को लेकर नारेबाजी की।


धरने की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए अपने कार्यालय में बुलाया। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायतें विस्तार से रखीं और अधिकारी के व्यवहार तथा कार्यशैली पर आपत्ति दर्ज कराई।


जिलाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि एक सप्ताह के भीतर पूरे मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिवक्ताओं से शांति बनाए रखने और प्रशासन को जांच का अवसर देने की अपील की। हालांकि अधिवक्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


धरना स्थल पर मौजूद अधिवक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को सुचारु रखना है। उनका कहना है कि तहसील में न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों का संचालन सुचारु होना चाहिए ताकि आम नागरिकों को समय पर राहत मिल सके।


धरने में शिवेंद्र प्रताप सिंह, वीरेंद्र मिश्रा, रविंद्र मिश्रा, शैलेश कुमार पांडेय, ज्ञानचंद श्रीवास्तव, वसीम अहमद,पुरुषोत्तम द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। प्रदर्शन के दौरान कई अधिवक्ताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशासनिक कार्यशैली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।


उधर, तहसील परिसर में चल रहे धरना-प्रदर्शन के कारण आम कामकाज भी प्रभावित हुआ, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कुछ नागरिकों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द समाधान निकालकर स्थिति सामान्य करेगा।


अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें तहसील बंदी और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध दर्ज कराया जा सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और कब तक तहसील में चल रहा यह गतिरोध समाप्त होता है।

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