प्रतापगढ़। जनपद में मतदाता सूची से नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी प्रतापगढ़ से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। मुलाकात के दौरान उन्होंने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायत पत्र में जिलानी ने आरोप लगाया कि जनपद के कई विधानसभा क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर दबाव डालकर जबरन फॉर्म-7 भरवाने के मामले भी सामने आए हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने की आशंका है।
अब्दुल कादिर जिलानी ने डीएम से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें कई ग्राम सभाओं से शिकायतें मिली हैं कि खास तौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम सूची से हटाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट सबसे बड़ा अधिकार है और यदि किसी भी वर्ग के मताधिकार से खिलवाड़ किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला माना जाएगा।
उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर बीएलओ ने दबाव के कारण फॉर्म लेने से मना किया, लेकिन कुछ जगहों पर जबरन फॉर्म रिसीव कराए गए। इस संबंध में दस्तावेज और प्रतियां प्रशासन को सौंप दी गई हैं, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
शिकायत में विशेष रूप से कुंडा, रामपुर और विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्रों के कुछ गांवों का उल्लेख किया गया है, जहां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। जिलानी ने मांग की कि इन क्षेत्रों में विशेष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
मुलाकात के दौरान जिलाधिकारी ने जिलानी को भरोसा दिलाया कि बिना उचित जांच और सत्यापन के किसी भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से नहीं काटा जाएगा। डीएम ने कहा कि यदि कहीं भी गलत तरीके से नाम हटाने की शिकायत मिलती है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डीएम द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद भी राजनीतिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची का सही और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही लोकतंत्र की आधारशिला है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से मतदाता सूची में नाम जुड़ने और कटने को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन इस बार मामला बड़े स्तर पर सामने आया है। कई नागरिकों ने भी शिकायत की है कि उन्हें अपने नाम की स्थिति जानने के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
इस पूरे प्रकरण में अब्दुल कादिर जिलानी की सक्रियता की भी चर्चा हो रही है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिलानी अक्सर जनता के मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ता भी मानते हैं कि मतदाता सूची जैसे संवेदनशील मुद्दे पर समय रहते आवाज उठाना जरूरी था, ताकि किसी भी नागरिक का मताधिकार प्रभावित न हो।
फिलहाल प्रशासन की ओर से जांच की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक तौर पर जांच टीम गठित किए जाने की घोषणा अभी नहीं हुई है। लेकिन डीएम के आश्वासन के बाद लोगों को उम्मीद है कि यदि कहीं भी गड़बड़ी हुई है तो उसे सुधारा जाएगा।
अब जिले की जनता और राजनीतिक दलों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल इतना तय है कि मतदाता सूची से नाम काटे जाने का यह मामला प्रतापगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है, और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आएगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बरकरार रहेगी।
























