प्रतापगढ़। जनपद में पुलिस और अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस मुठभेड़ में घायल होकर जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया 25 हजार रुपये का इनामी दुष्कर्म आरोपी  पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इस घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में ड्यूटी पर तैनात एक दरोगा समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।


जानकारी के अनुसार, आरोपी जावेद अली पर सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के प्रयास का गंभीर आरोप है। चार दिन पहले इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह फरार चल रहा था। पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार टीमों का गठन किया था। इसी क्रम में बीती रात पट्टी कोतवाली क्षेत्र के आमपुर गांव के पास वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हो गई।


पुलिस के मुताबिक, चेकिंग के दौरान जब पुलिस टीम ने जावेद को घेर लिया तो उसने खुद को फंसा देख पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली आरोपी के पैर में लगी, जिससे वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पट्टी पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर जिला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।


जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती के दौरान आरोपी की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। लेकिन अस्पताल में तैनात पुलिसकर्मियों की लापरवाही उस समय सामने आई जब बुधवार सुबह आरोपी अपने बेड से उठकर बाथरूम जाने के बहाने निकल गया और फिर वापस नहीं लौटा। काफी देर तक जब वह नहीं दिखा तो पुलिसकर्मियों को शक हुआ। खोजबीन की गई, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुका था।


आरोपी के फरार होने की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। तत्काल उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई। प्रारंभिक जांच में ड्यूटी में गंभीर लापरवाही सामने आने पर ड्यूटी पर तैनात दरोगा सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।


पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और जिले की सीमाओं पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


यह घटना न सिर्फ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि अस्पतालों में बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो आरोपी मुठभेड़ में गोली लगने से घायल था, पैर में गोली लगने के बाद चलने-फिरने में असमर्थ बताया जा रहा था, वह आखिर अस्पताल से कैसे फरार हो गया? क्या वाकई उसकी हालत इतनी सामान्य थी कि वह अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से बाहर निकल सका, या फिर उसकी मदद किसी ने की?


दूसरा अहम सवाल ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को लेकर है। बताया जा रहा है कि आरोपी सुबह बाथरूम जाने के बहाने उठा और फिर गायब हो गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आरोपी जब बेड से उठा, तब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी क्या कर रहे थे? क्या वे सो रहे थे, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? अगर पुलिस सतर्क होती तो एक घायल और इनामी अपराधी का यूं फरार होना लगभग नामुमकिन था।


तीसरा सवाल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर है। जिला मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पताल में चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। वार्ड, गलियारे, मुख्य द्वार और बाहर तक निगरानी की व्यवस्था रहती है। ऐसे में आरोपी कैमरों की नजर से बचकर कैसे निकल गया? क्या सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई है, या फिर कैमरे उस वक्त काम नहीं कर रहे थे?


सबसे चौंकाने वाला सवाल यह भी है कि अस्पताल शहर के बीचों-बीच स्थित है। घायल हालत में आरोपी ज्यादा दूर तक कैसे जा सकता है? क्या वह पैदल भागा, या फिर पहले से कोई वाहन उसकी मदद के लिए मौजूद था? अगर वाहन था तो उसे किसने बुलाया और किसने मदद की?


इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या आरोपी को अंदर से किसी ने मदद पहुंचाई? पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के कुछ सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि फरारी के पीछे किसी संगठित नेटवर्क या अंदरूनी मिलीभगत की भूमिका हो सकती है।


घटना ने पहले से ही नाराज पीड़ित परिवार और व्यापारियों के गुस्से को और भड़का दिया है। लोगों का कहना है कि जब एक जघन्य अपराध का आरोपी पुलिस हिरासत में भी सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की क्या गारंटी है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी की तलाश में टीमें गठित कर दी हैं और सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कही जा रही है। लेकिन तब तक ये तमाम सस्पेंस भरे सवाल लोगों के मन में गूंजते रहेंगे—आखिर घायल इनामी आरोपी अस्पताल से कैसे भागा, किसकी लापरवाही थी और किसने उसे भगाने में मदद की?

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