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प्रतापगढ़ जनपद में पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने घुइसरनाथ पुलिस चौकी प्रभारी और एक सिपाही के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने महिला के साथ मारपीट, गाली-गलौज, धमकी देने और नाबालिग बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए यह आदेश पारित किया है। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।


मामला संगीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत घुइसरनाथ पुलिस चौकी से जुड़ा हुआ है। पीड़िता महिला ने अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि 4 जनवरी 2026 की शाम वह अपने चचेरे देवर और पिता के साथ ठेला लगाकर घर लौट रही थी। रास्ते में सड़क किनारे अचानक एक अज्ञात वाहन ने उसके ठेले में टक्कर मार दी, जिससे वह और उसके साथ मौजूद लोग बाल-बाल बचे। महिला का आरोप है कि घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर आपसी पहचान होने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।


पीड़िता के अनुसार, इस घटना के कुछ समय बाद घुइसरनाथ चौकी इंचार्ज इंद्रेश प्रजापति, सिपाही नरेश कुमार और दो अन्य अज्ञात व्यक्ति एक निजी कार से उसके घर पहुंचे। आरोप है कि चौकी इंचार्ज और सिपाही ने आते ही महिला के चचेरे देवर को जातिसूचक शब्दों से गाली देना शुरू कर दिया। जब महिला ने इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मियों और उनके साथ आए अन्य लोगों ने मिलकर महिला के साथ मारपीट की।


महिला ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान उसके चचेरे भतीजे और घर में मौजूद नाबालिग लड़कियों को भी लात-घूंसे मारे गए। आरोपियों ने पूरे परिवार को डराने के लिए कहा कि यदि इस मामले की शिकायत कहीं की गई तो सभी को झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाएगा। पीड़िता का कहना है कि पुलिसकर्मियों की दबंगई से पूरा परिवार दहशत में आ गया।


पीड़िता ने आगे बताया कि इस घटना के बाद वह न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची, लेकिन वहां भी उसके साथ जबरदस्ती और गलत व्यवहार किया गया। उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उल्टे उसे ही चुप रहने की सलाह दी गई। महिला का आरोप है कि उसने इस मामले की शिकायत पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी की, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।


न्याय न मिलने से आहत होकर पीड़िता ने अंततः अदालत का दरवाजा खटखटाया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र और उपलब्ध तथ्यों पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर माना। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।


एडीजे एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) पारुल वर्मा ने अपने आदेश में पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ को निर्देश दिया कि वे घुइसरनाथ चौकी प्रभारी इंद्रेश प्रजापति और सिपाही नरेश कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएं। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि एक सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू की जाए।


अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। आम जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है कि जब पुलिस पर ही इस तरह के गंभीर आरोप लगते हैं, तो आम लोगों को न्याय कैसे मिलेगा। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।


फिलहाल अब सभी की नजरें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि अदालत के आदेश के बाद दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई होती है या मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यह मामला न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकार और सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है।

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