प्रतापगढ़, 11 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ा और प्रभावी निर्णय लेते हुए Farmer ID (किसान पहचान पत्र) को अब पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला सीधे तौर पर किसानों की रोजमर्रा की खेती, सरकारी योजनाओं और उनके आर्थिक हितों से जुड़ा हुआ है। अब बिना Farmer ID के किसान न तो सरकारी योजनाओं का लाभ ले पाएंगे और न ही खेती से जुड़ी जरूरी सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान रह जाएगी। ऐसे में यह बदलाव किसानों के लिए जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि वे समय रहते इसे समझें और तुरंत कार्रवाई करें।
जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जनपद प्रतापगढ़ में 6 अप्रैल 2026 से 15 अप्रैल 2026 तक एक विशेष संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के सभी किसानों का शत-प्रतिशत Farmer ID बनाना है। इसके लिए कृषि विभाग और राजस्व विभाग की टीमें मिलकर काम कर रही हैं। गांव-गांव में कैंप लगाए जा रहे हैं, जहां किसानों का पंजीकरण किया जा रहा है और उन्हें Farmer ID उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि कोई भी किसान इस प्रक्रिया से छूटने न पाए।
सरकार के इस फैसले के बाद अब खेती से जुड़ी लगभग हर सरकारी सुविधा Farmer ID से जुड़ने जा रही है। उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की खरीद के लिए भी Farmer ID आवश्यक होगा। इसके साथ ही सब्सिडी, अनुदान और फसलों की सरकारी खरीद में भी यह पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। गेहूं, धान, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों को सरकार को बेचने के लिए भी Farmer ID दिखाना जरूरी होगा। इसका मतलब यह है कि जिन किसानों के पास यह पहचान पत्र नहीं होगा, वे अपनी उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं बेच पाएंगे।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी अब Farmer ID के माध्यम से ही दिया जाएगा। इससे सरकार का उद्देश्य यह है कि योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक और पात्र किसानों तक पहुंचे और बीच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा न हो। Farmer ID के जरिए हर किसान की एक यूनिक पहचान तैयार की जा रही है, जिसमें उसकी जमीन, फसल और बैंक से जुड़ी जानकारी दर्ज होगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।
अधिकारियों के अनुसार मई 2026 से उर्वरकों का वितरण भी पूरी तरह Farmer ID पर आधारित कर दिया जाएगा। चाहे किसान प्राथमिक सहकारी समितियों (PACS) से खाद लें या निजी दुकानों से खरीद करें, हर जगह Farmer ID दिखाना अनिवार्य होगा। यह बदलाव किसानों के लिए एक बड़ा संकेत है कि अब बिना Farmer ID के खेती करना भी मुश्किल हो सकता है। क्योंकि खाद, बीज और अन्य आवश्यक संसाधनों के बिना खेती संभव नहीं है।
सरकार कृषि क्षेत्र को डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में कृषि विभाग अपने सभी पोर्टलों को Farmer Registry से जोड़ने की प्रक्रिया में लगा हुआ है। इसका लाभ यह होगा कि हर किसान का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा और जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत देखा जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता आएगी और लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाया जा सकेगा। साथ ही इससे बिचौलियों की भूमिका भी कम हो जाएगी, जो अक्सर योजनाओं के लाभ में बाधा बनते हैं।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गांवों में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है और किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे समय रहते अपना Farmer ID बनवा लें। कई जगहों पर राजस्व और कृषि विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर पंचायतों की भी मदद ली जा रही है ताकि अधिक से अधिक किसानों तक यह जानकारी पहुंच सके।
उप कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव ने जनपद के किसानों से अपील करते हुए कहा है कि वे इस अभियान को हल्के में न लें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में कृषि से जुड़े सभी विभाग—जैसे उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता और लघु सिंचाई—की योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनके पास वैध Farmer ID होगा। इसलिए यह जरूरी है कि हर किसान जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराए और Farmer ID प्राप्त करे। उन्होंने यह भी बताया कि Farmer ID बनवाने की प्रक्रिया को सरल रखा गया है और कैंप में मौजूद कर्मचारी किसानों की हर संभव सहायता कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभियान की समय सीमा बहुत सीमित है। 15 अप्रैल 2026 इस विशेष अभियान की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। यानी किसानों के पास बहुत कम समय बचा है। यदि इस अवधि में Farmer ID नहीं बन पाई, तो बाद में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर फसल की बिक्री, खाद की उपलब्धता और सरकारी योजनाओं के लाभ में बाधा आ सकती है।
कई किसानों के मन में इस नई व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ किसानों को यह चिंता है कि जिनके पास जमीन के पूरे कागजात नहीं हैं, उनका पंजीकरण कैसे होगा। वहीं कुछ किसानों को तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर भी संशय है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए कैंपों में व्यवस्था की गई है और हर किसान की मदद की जा रही है।
यह बदलाव भले ही शुरू में थोड़ा कठिन लगे, लेकिन लंबे समय में यह किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। Farmer ID के माध्यम से सरकार किसानों का एक सटीक और पारदर्शी डाटा तैयार कर रही है, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
अंत में यही कहा जा सकता है कि Farmer ID अब किसानों के लिए एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। जो किसान समय रहते इसे बनवा लेंगे, वे भविष्य में सभी सुविधाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगे। वहीं जो किसान इसे नजरअंदाज करेंगे, उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसान इस मौके को न गंवाएं और जल्द से जल्द अपने नजदीकी कैंप में जाकर Farmer ID बनवा लें, ताकि वे आने वाले समय में किसी भी सरकारी योजना से वंचित न रह जाएं।







