प्रतापगढ़ में वरिष्ठ अधिवक्ता की पैरवी के बाद एएसजे/एफटीसी न्यायालय ने रोहित सिंह और पप्पू सिंह को किया दोषमुक्त, चैंबर नंबर-11 में अधिवक्ताओं ने मिठाई खिलाकर जताई खुशी

प्रतापगढ़। जिला एवं सत्र न्यायालय प्रतापगढ़ में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व एडीजीसी क्रिमिनल मोहम्मद नसीम खां की प्रभावी पैरवी से जुड़े एक पुराने आपराधिक मुकदमे में न्यायालय ने दो सगे भाइयों रोहित सिंह और पप्पू सिंह को दोषमुक्त कर दिया। करीब 15 साल तक चले इस मुकदमे में साक्ष्यों, गवाहों की जिरह और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद आए फैसले को अभियुक्त पक्ष के लिए बड़ी कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इस मामले में एएसजे/एफटीसी न्यायालय प्रतापगढ़ की न्यायाधीश अंकिता दुबे की अदालत ने फैसला सुनाया।
2011 में दर्ज हुआ था मुकदमा
मामले के अनुसार, बेचू पुत्र राम नारायण निवासी आमी सराय सैफ खान, थाना पट्टी, जनपद प्रतापगढ़ ने 21 जून 2011 को पट्टी थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि दाऊदपुर निवासी सूर्य नारायण के पुत्र बबलू सिंह, पप्पू सिंह और रोहित सिंह उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले गए हैं।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने मामले में दुष्कर्म से संबंधित धारा 376 भी बढ़ाई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी बबलू सिंह की मृत्यु हो गई। वहीं, शेष अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। लगभग डेढ़ दशक तक चले इस मुकदमे में साक्ष्यों, गवाहों की जिरह और पक्ष-विपक्ष की दलीलों के बाद अदालत ने रोहित सिंह और पप्पू सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
नसीम खां की पैरवी और कानूनी दलीलों की रही अहम भूमिका
इस मुकदमे में अभियुक्त पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व एडीजीसी क्रिमिनल मोहम्मद नसीम खां ने पैरवी की। लंबे समय तक चले मुकदमे में साक्ष्यों का परीक्षण, गवाहों से जिरह और न्यायालय के समक्ष कानूनी पक्ष रखने की प्रक्रिया के बाद अभियुक्तों को राहत मिली।
अदालती मामलों में केवल आरोप लगना और आरोप सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी भी आपराधिक मुकदमे का फैसला साक्ष्यों, गवाहियों और लागू कानून के आधार पर होता है। इस मामले में न्यायालय द्वारा दोनों अभियुक्तों को दोषमुक्त किए जाने के बाद उनके पक्ष में कानूनी कार्यवाही का महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया।
मोहम्मद नसीम खां पूर्व में एडीजीसी क्रिमिनल के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। आपराधिक मामलों में उनके अनुभव और न्यायालय में प्रभावी ढंग से पक्ष रखने की भूमिका को उनके सहयोगियों ने सराहा।
चैंबर नंबर-11 में अधिवक्ताओं ने मिठाई खिलाकर मनाई खुशी
न्यायालय के फैसले के बाद अधिवक्ता भवन स्थित चैंबर नंबर-11 में खुशी का माहौल देखने को मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद नसीम खां को उनके सहयोगियों और जूनियर अधिवक्ताओं ने मिठाई खिलाकर बधाई दी।
इस दौरान अधिवक्ता रुस्तम अली, राजेश यादव और इबरार अहमद सहित अन्य अधिवक्ताओं ने खुशी जाहिर की। सहयोगियों ने मुकदमे में हुई पैरवी और कानूनी प्रक्रिया में उनके योगदान की सराहना की।
एक ही दिन में दो मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी कार्यवाही
बताया गया कि इसी दिन वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद नसीम खां ने एक अन्य दुष्कर्म के मुकदमे में भी आरोपी को सेशन कोर्ट से जमानत दिलाने में सफलता हासिल की। इस प्रकार एक ओर पुराने मुकदमे में दो अभियुक्तों के दोषमुक्त होने का फैसला सामने आया, वहीं दूसरी ओर दूसरे मामले में आरोपी को जमानत मिली।
हालांकि, दोषमुक्ति और जमानत दोनों अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। दोषमुक्ति का अर्थ है कि संबंधित मुकदमे में न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराया, जबकि जमानत का अर्थ मुकदमे की सुनवाई या आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित शर्तों पर रिहाई है।
प्रतापगढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई इन दोनों कानूनी कार्यवाहियों के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद नसीम खां और उनके सहयोगियों के बीच चर्चा रही। लगभग 15 साल पुराने मुकदमे में आया फैसला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि आपराधिक न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य, गवाहों की विश्वसनीयता और प्रभावी कानूनी बहस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।






