प्रतापगढ़। जनपद के रानीगंज थाना क्षेत्र के जगदीशपुर मेढ़ौली गांव में शनिवार शाम बारिश के बीच नाले में डूबने से चाचा-भतीजे की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक युवक को बचाने के लिए उसका चाचा तेज बहाव वाले नाले में कूद गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। देखते ही देखते दोनों पानी की गहराई में समा गए। चाचा का शव घटना के करीब 30 मिनट बाद ही स्थानीय गोताखोरों ने खोज निकाला, जबकि भतीजे की तलाश रातभर चलती रही। रविवार सुबह ग्रामीणों ने फिर रेस्क्यू शुरू किया और करीब 7 बजे मकतब स्कूल के पीछे से उसका शव बरामद हुआ।


कुछ ही मिनटों में मातम में बदल गई शाम
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5 बजे जगदीशपुर मेढ़ौली गांव में कुछ लोग नाले के पास मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान गांव निवासी लल्ले उर्फ विकास विश्वकर्मा (25) पुत्र फूलचंद विश्वकर्मा बांध के रास्ते नाले के एक तरफ से दूसरी तरफ जाने लगा। बारिश के कारण नाले में पानी का बहाव तेज था। अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह तेज बहाव के साथ पानी में गिर गया।
लल्ले को पानी में डूबता देख मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उसकी चीख-पुकार और लोगों की आवाज सुनकर उसका चाचा नन्हे विश्वकर्मा (45) मौके पर पहुंचा। भतीजे को बचाने की कोशिश में नन्हे ने बिना अपनी जान की परवाह किए तेज बहाव में छलांग लगा दी।
लेकिन जिस भतीजे को बचाने के लिए चाचा पानी में उतरा, उसी बहाव ने दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते दोनों पानी में गायब हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाते हुए स्थानीय गोताखोरों को बुलाया।
30 मिनट में मिला चाचा का शव, भतीजे की तलाश रही जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोरों ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। करीब 30 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने नन्हे विश्वकर्मा का शव पानी से बाहर निकाल लिया।
सूचना मिलते ही रानीगंज थाना प्रभारी प्रदीप कुमार और कस्बा चौकी प्रभारी अंकित श्रीवास्तव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने नन्हे के शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।
वहीं दूसरी ओर लल्ले उर्फ विकास की तलाश देर रात तक जारी रही। स्थानीय गोताखोर पानी में उतरकर लगातार उसकी तलाश करते रहे, लेकिन अंधेरा बढ़ने और नाले में तेज बहाव के कारण उसका पता नहीं चल सका।
रात गुजर गई, लेकिन परिवार और ग्रामीणों की उम्मीद नहीं टूटी।
सुबह फिर शुरू हुआ रेस्क्यू, स्कूल के पीछे मिला शव
रविवार सुबह करीब 5 बजे स्थानीय लोगों ने एक बार फिर लल्ले की तलाश शुरू की। ग्रामीण नाले और आसपास के इलाकों में पानी के बहाव की दिशा में उसकी खोज में जुट गए।
करीब दो घंटे की तलाश के बाद सुबह लगभग 7 बजे मेढ़ौली-चकसरा बॉर्डर स्थित मकतब स्कूल के पीछे लल्ले उर्फ विकास विश्वकर्मा का शव बरामद कर लिया गया।
शव मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस युवक की तलाश में परिवार की आंखें रातभर रास्ता देखती रहीं, आखिरकार उसका शव सामने था। मौके पर मौजूद ग्रामीण भी गमगीन हो उठे।
पुलिस ने लल्ले के शव को भी कब्जे में लेकर पंचनामा भरने की कार्रवाई की और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
दो साल पहले मां गई, अब पिता भी नहीं रहे
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू नन्हे विश्वकर्मा के परिवार की कहानी है। नन्हे की पत्नी की करीब दो वर्ष पहले बीमारी के चलते मौत हो चुकी थी। पत्नी के जाने के बाद नन्हे ही अपने दो मासूम बच्चों की दुनिया थे।
घर में उनका 10 वर्षीय बेटा सूरज और 4 वर्षीय बेटी प्राची है। दोनों बच्चे पहले ही मां के साये से वंचित हो चुके थे। अब अचानक पिता की मौत ने उनकी जिंदगी से वह सहारा भी छीन लिया, जिसके भरोसे वे अपना बचपन जी रहे थे।
परिजनों के मुताबिक बच्चों की मां की मौत 3 दिसंबर 2024 को हुई थी। मां के जाने के बाद पिता ने ही दोनों बच्चों को संभाला था। लेकिन शनिवार को भतीजे को बचाने की कोशिश में नन्हे की भी मौत हो गई।
मासूमों को रोता देख नम हो गईं आंखें
रविवार को जब नन्हे का शव घर पहुंचा तो वहां का माहौल बेहद मार्मिक हो गया। पिता के शव के पास बैठे मासूम सूरज और प्राची का रो-रोकर बुरा हाल था।
जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में दोनों मासूम अपने पिता को खोने का दर्द झेल रहे हैं। बच्चों को रोते देखकर मौके पर मौजूद ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गईं।
लोगों की जुबान पर बस यही बात थी कि पहले मां का साया उठा और अब पिता भी हमेशा के लिए छोड़कर चले गए।
वहीं लल्ले की मौत से भी उसके परिवार में मातम पसरा हुआ है। एक पल में हुए इस हादसे ने दो परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया।
एक को बचाने निकला चाचा, दोनों की चली गई जान
यह हादसा एक बार फिर बताता है कि बारिश के मौसम में पानी के तेज बहाव के सामने थोड़ी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। नन्हे ने भतीजे को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। वह मदद के लिए पानी में उतरा, लेकिन तेज बहाव ने उसे भी अपनी चपेट में ले लिया।
स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता से दोनों शवों को खोजने में सफलता मिली। घटना के बाद से पूरे गांव में शोक का माहौल है।
रुबरु इंडिया की अपील—बारिश में नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से रहें दूर
रुबरु इंडिया सभी लोगों से अपील करता है कि बारिश के मौसम में नाले, नदी, रपटे, बांध और तेज बहाव वाले पानी के आसपास जाने से बचें। पानी कम दिखाई देने पर भी उसके नीचे की गहराई और बहाव का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल होता है।
विशेषकर बच्चों और युवाओं को ऐसे स्थानों पर जाने से रोकें। मछली पकड़ने, नहाने या रास्ता पार करने के दौरान किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं। यदि पानी का बहाव तेज हो तो किसी भी हालत में उसे पार करने की कोशिश न करें।
क्योंकि जिंदगी अनमोल है… एक पल की जिद पूरी जिंदगी का दर्द बन सकती है।
जगदीशपुर मेढ़ौली की यह घटना सिर्फ दो परिवारों का दर्द नहीं, बल्कि हर उस परिवार के लिए चेतावनी है जो बारिश में नाले और तेज बहाव वाले स्थानों को सामान्य समझकर वहां जाने का जोखिम उठाता है।
आज दो घरों में मातम है, दो मासूम परिवारों की दुनिया उजड़ गई है। काश, बारिश के इस मौसम में लोग सावधानी को अपनी आदत बना लें, ताकि किसी और मां की गोद, किसी और बच्चे का बचपन और किसी और परिवार का सहारा इस तरह न छिने।







