कुछ ही सेकंड में उजड़ गया पशुपालकों का सहारा, ट्रैक पार कर रहीं महिलाएं बाल-बाल बचीं
प्रतापगढ़। हथिगवां थाना क्षेत्र में बुधवार की सुबह प्रयागराज-लखनऊ रेलखंड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब तेज रफ्तार इंटरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आकर करीब 30 से 35 बकरियों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा कृष्णा राम का पुरवा के पास रेलवे फाटक पर हुआ। घटना के दौरान रेलवे ट्रैक के आसपास मौजूद कुछ महिलाएं भी ट्रेन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गईं। कुछ ही पलों में रेलवे ट्रैक का मंजर ऐसा हो गया कि मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 10 बजे लखनऊ से प्रयागराज की ओर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस खिदिरपुर के पास रेलवे फाटक से गुजर रही थी। इसी दौरान रेलवे लाइन के आसपास घूम रही बकरियां अचानक ट्रैक पर पहुंच गईं। ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि बकरियों को संभलने या वहां से हटने का मौका तक नहीं मिला।
देखते ही देखते तेज रफ्तार ट्रेन कई बकरियों को अपनी चपेट में लेते हुए आगे निकल गई। हादसे में करीब 30 से 35 बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई। अचानक हुए इस हादसे से आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। ट्रेन गुजरने के बाद जब लोगों ने रेलवे ट्रैक की ओर देखा तो वहां बकरियों के शव पड़े थे। यह दृश्य देखकर पशुपालकों और ग्रामीणों में मायूसी छा गई।
सबसे बड़ा हादसा टल गया। जिस समय ट्रेन रेलवे फाटक से गुजर रही थी, उसी दौरान कुछ महिलाएं भी रेलवे ट्रैक पार कर रही थीं। ट्रेन को अचानक अपनी ओर आता देख महिलाओं ने किसी तरह ट्रैक से हटकर अपनी जान बचाई। चंद सेकंड की देरी या जरा सी चूक होती तो बकरियों के साथ इंसानी जिंदगी का भी बड़ा नुकसान हो सकता था। महिलाओं के सुरक्षित बच जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवान मौके पर पहुंचे। जवानों ने घटनास्थल का जायजा लिया और आवश्यक कार्रवाई के बाद ट्रेन को आगे रवाना किया। हादसे के बाद रेलवे फाटक के आसपास काफी देर तक लोगों की भीड़ जमा रही।
बकरियां ग्रामीण पशुपालकों के लिए केवल पशु नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी और परिवार के भरण-पोषण का बड़ा सहारा होती हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बकरियों की मौत ने पशुपालकों को गहरा झटका दिया। जिन परिवारों के लिए यही बकरियां आमदनी का जरिया थीं, उनके सामने आर्थिक नुकसान की चिंता भी खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे ट्रैक के आसपास पशुओं के पहुंचने की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। बुधवार की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि यदि समय रहते बकरियां ट्रैक से नहीं हटतीं और महिलाएं भी वहां मौजूद रहतीं, तो हादसा कितना भयावह हो सकता था।
फिलहाल घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन 30 से 35 बेजुबान जानों का यूं असमय खत्म हो जाना पशुपालकों के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। कुछ सेकंड तक रेलवे ट्रैक पर गूंजती ट्रेन की आवाज थमी, तो पीछे रह गया बकरियों की मौत का दर्द और उन परिवारों की चिंता, जिनका सहारा देखते ही देखते छिन गया।







