प्रतापगढ़, 23 मई 2026। जनसमस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के उद्देश्य से थाना रानीगंज में शनिवार को थाना समाधान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक और पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जहां जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय तथा पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। समाधान दिवस के दौरान बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर थाना परिसर पहुंचे।

थाना परिसर में आयोजित समाधान दिवस के दौरान भूमि विवाद, अवैध कब्जा, राजस्व संबंधी मामले तथा स्थानीय समस्याओं से जुड़े प्रार्थना पत्र अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल 56 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें राजस्व विभाग की 37 तथा पुलिस विभाग की 19 शिकायतें शामिल रहीं। अधिकारियों ने मौके पर ही कुछ मामलों की सुनवाई करते हुए पुलिस विभाग की 6 और राजस्व विभाग की 2 शिकायतों का तत्काल निस्तारण कराया। कुल मिलाकर 8 मामलों का मौके पर समाधान किया गया।

समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने एक-एक शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जनता की शिकायतों को औपचारिकता मानकर निपटाने के बजाय उनकी जड़ तक पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण तरीके से समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में लापरवाही या अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम को निर्देशित किया कि वे मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें और समयबद्ध ढंग से मामलों का निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि विवादित मामलों में दोनों पक्षों को बुलाकर पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से सुनवाई की जाए, ताकि भविष्य में विवाद दोबारा उत्पन्न न हो।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि आम जनता को न्याय पाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो जाए। अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील रहने और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश भी दिए गए।
इस दौरान थाना समाधान दिवस में क्षेत्राधिकारी रानीगंज विनय प्रभाकर साहनी सहित राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी की मौजूदगी के बावजूद रानीगंज तहसील के अधिकतर लेखपाल मौके पर उपस्थित नहीं दिखाई दिए। अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर लोगों के बीच चर्चा भी होती रही। समाधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिम्मेदार कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं।

वहीं कार्यक्रम के दौरान एक महिला लेखपाल से जिलाधिकारी द्वारा पट्टा संबंधी एक जानकारी पूछी गई। बताया जाता है कि जिलाधिकारी ने पूछा कि किसी व्यक्ति को पट्टा आवंटित करने से पहले क्या बोली की प्रक्रिया अपनाई जाती है या नहीं। इस सवाल का जवाब महिला लेखपाल तत्काल नहीं दे सकीं। महिला लेखपाल ने जवाब देते हुए कहा कि वह नई हैं और उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दूसरे लेखपाल बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
इस घटना ने मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। प्रशासनिक कार्यक्रमों में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैयारी तथा जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि अनुपस्थित लेखपालों के मामले में आगे कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं, लेकिन समाधान दिवस में उनकी गैरमौजूदगी और एक अधिकारी की जानकारी के अभाव ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।







