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आजीवन कारावास की सजा, जेल में एंट्री और फिर मौत… 9 दिन में खत्म हो गई उम्रकैद की कहानी!

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43 साल पुराने हत्या के मामले में सजा पाए बंदी की इलाज के दौरान मौत, जिला अस्पताल में तोड़ा दम

प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी की गुरुवार सुबह जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान 72 वर्षीय राधेश्याम पुत्र राम खेलावन निवासी गोगौर गांव के रूप में हुई है। घटना के बाद जेल प्रशासन ने नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। बंदी की मौत की सूचना परिजनों को दे दी गई है और शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

43 साल पुराने हत्या के मामले में मिली थी सजा

जानकारी के अनुसार राधेश्याम को लगभग 43 वर्ष पुराने हत्या के एक मामले में हाल ही में न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया गया था। न्यायालय ने उसे नौ दिन पूर्व आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद उसे प्रतापगढ़ जिला कारागार में निरुद्ध किया गया था। लंबे समय तक चले न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोष सिद्ध होने पर उसे जेल भेजा गया था।

गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था बंदी

जेल अधीक्षक ऋषभ द्विवेदी ने बताया कि राधेश्याम पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित था। उसे पल्मोनरी टीबी (क्षय रोग) और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी गंभीर सांस संबंधी बीमारियां थीं। 26 मई 2026 को जिला कारागार में दाखिल होने के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसे कारागार चिकित्सालय में भर्ती कर दिया गया था।

जेल चिकित्सकों की निगरानी में उसका लगातार उपचार किया जा रहा था। नियमित जांच और आवश्यक दवाएं भी दी जा रही थीं। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी की गंभीर बीमारी को देखते हुए उसके स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखी जा रही थी।

सुबह अचानक बिगड़ी तबीयत

जेल अधिकारियों के मुताबिक 3 जून की शाम राधेश्याम सामान्य स्थिति में अपनी बैरक में बंद हुआ था। गुरुवार 4 जून की सुबह जेल खुलने पर भी उसकी स्थिति सामान्य पाई गई। हालांकि कुछ समय बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी।

बंदी की हालत खराब होते ही जेल कर्मियों ने तत्काल कारागार चिकित्साधिकारी को सूचना दी। चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार शुरू किया और उसकी स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया।

जिला अस्पताल रेफर, चिकित्सकों ने किया मृत घोषित

प्राथमिक उपचार के बावजूद जब उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो चिकित्सकों ने उसे तत्काल जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ रेफर कर दिया। इसके बाद जेल एम्बुलेंस से सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

जिला अस्पताल में इमरजेंसी विभाग और टीबी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बंदी की जांच की। चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए आवश्यक उपचार किया, लेकिन उसकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही। जांच के बाद सुबह लगभग 6:56 बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

बंदी की मौत के बाद जिला प्रशासन और जेल प्रशासन को सूचना दी गई। नियमानुसार पंचायतनामा की कार्रवाई कराई जा रही है तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी को समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई थी और उसकी बीमारी को देखते हुए लगातार निगरानी रखी जा रही थी। फिलहाल मामले में सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। घटना के बाद जेल प्रशासन सतर्क है और पूरे मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।

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