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बेटी की जिद के आगे झुका पिता, छह घंटे तक गुस्से में बैठे रहे खुर्शीद आलम, आखिरकार मंदिर में हुई शादी

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प्रतापगढ़। पट्टी कोतवाली क्षेत्र का दाऊदपुर गांव इन दिनों एक अंतरधार्मिक विवाह को लेकर चर्चा में है। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मुस्लिम पिता खुर्शीद आलम की हो रही है, जिन्होंने पहले अपनी बेटी के फैसले का कड़ा विरोध किया, लेकिन आखिरकार बेटी की जिद और उसकी खुशी के आगे उन्हें झुकना पड़ा।

दाऊदपुर गांव निवासी खुर्शीद आलम की बेटी सानिया बानो का गांव के ही अमन कुमार से पिछले चार वर्षों से प्रेम संबंध चल रहा था। दोनों के घरों की दूरी महज 300 मीटर है। जब पिता को इस प्रेम संबंध की जानकारी हुई तो वह बेहद नाराज हो गए। परिवार और समाज के बीच इस रिश्ते को लेकर काफी विरोध शुरू हो गया।

लड़की के पिता मंदिर में नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते

बताया जाता है कि खुर्शीद आलम ने गुस्से में आकर मामले की शिकायत पट्टी कोतवाली में की। उनका कहना था कि उनकी बेटी को समझाया जाए और इस रिश्ते को समाप्त कराया जाए। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया, जहां करीब छह घंटे तक पंचायत चलती रही।

थाने में पिता खुर्शीद आलम अपनी नाराजगी खुलकर जताते रहे। वह बार-बार कहते रहे कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए अलग सपने देखे थे और वह इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर सकते। दूसरी ओर सानिया अपने फैसले पर अड़ी रही और उसने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मर्जी से अमन के साथ जीवन बिताना चाहती है।

घंटों चली बातचीत के दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण हो गया। पिता का गुस्सा और बेटी की जिद आमने-सामने खड़ी दिखाई दी। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया और कानून के अनुसार बालिग युवती की इच्छा को महत्वपूर्ण बताया।

आखिरकार खुर्शीद आलम का गुस्सा बेटी की खुशी के आगे कमजोर पड़ गया। उन्होंने भारी मन से अपनी सहमति दी और कहा कि यदि बेटी की खुशी इसी में है तो वह उसके फैसले के रास्ते में नहीं आएंगे।

इसके बाद सानिया और अमन का विवाह स्थानीय मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया। सानिया ने शपथ पत्र देकर अपनी मर्जी से विवाह करने की बात कही, जबकि अमन ने जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया।

इस घटना के बाद गांव और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे बेटी की जिद की जीत बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे एक पिता के टूटते हुए सपनों की कहानी कह रहे हैं। हालांकि अंत में एक नाराज और गुस्से में बैठे पिता ने अपनी बेटी की खुशी को सबसे ऊपर रखा और उसकी जिंदगी का फैसला उसी के हाथों में छोड़ दिया।

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