प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में कथित तौर पर गलत और असत्य शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर पंजीकरण कराने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई तेज हो गई है। इसी क्रम में मंगलवार को प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में 68 अधिवक्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इनमें प्रतापगढ़ जिले के चार अधिवक्ताओं के नाम भी शामिल हैं। बार काउंसिल के सचिव आरके शुक्ला की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई जांच
बताया गया है कि यह पूरी कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। बार काउंसिल की ओर से अधिवक्ताओं की शैक्षिक योग्यता से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जा रही है। इसके तहत अधिवक्ताओं की एलएलबी डिग्री, अंकपत्र और अन्य शैक्षिक दस्तावेज संबंधित विश्वविद्यालयों को भेजकर उनका सत्यापन कराया जा रहा है।
सत्यापन के दौरान यदि किसी अधिवक्ता के अभिलेख विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं या उन्हें गलत, असत्य अथवा संदिग्ध पाया जाता है तो संबंधित अधिवक्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत अब 68 अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
प्रतापगढ़ के चार अधिवक्ताओं के नाम
दर्ज मुकदमे में प्रतापगढ़ जिले के चार अधिवक्ताओं के नाम सामने आए हैं। इनमें ग्राम एवं पोस्ट प्रेमधन पट्टी, तहसील रानीगंज, थाना कंधई निवासी माता प्रसाद पाण्डेय, पंजीकरण संख्या यूपी 16046/10, का नाम शामिल है।
माता प्रसाद पाण्डेय की वर्ष 2004 की एलएलबी डिग्री और रोल नंबर 6856 के अंकपत्र का संबंधित विश्वविद्यालय से सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान अंकपत्र की छायाप्रति को गलत एवं असत्य बताए जाने का उल्लेख मुकदमे में किया गया है। इसके बाद उनका नाम भी दर्ज मुकदमे में शामिल किया गया।
सगे भाई का भी नाम मुकदमे में
इसी गांव के रहने वाले रामप्रकाश पाण्डेय भी मुकदमे में नामजद किए गए हैं। बताया गया है कि रामप्रकाश पाण्डेय, माता प्रसाद पाण्डेय के सगे भाई हैं। उनकी वर्ष 2004 की एलएलबी डिग्री के रोल नंबर 7294 का भी सत्यापन कराया गया था।
सत्यापन के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि वर्ष 2004 में संबंधित अनुक्रमांक आवंटित ही नहीं किया गया था। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में अनुक्रमांक नहीं मिलने के बाद उनके शैक्षिक अभिलेखों को लेकर सवाल खड़े हुए और उनका नाम भी प्राथमिकी में शामिल किया गया।
दो अन्य अधिवक्ताओं के अभिलेख भी सवालों के घेरे में
मुकदमे में प्रतापगढ़ के सड़क बाजार, पूरे मुस्तफा खान निवासी रफीउल्ला और थाना कुंडा क्षेत्र के रहवई, नई बाजार, जगदीशपुर निवासी सत्यम मिश्रा के नाम भी शामिल हैं।
बताया गया है कि दोनों अधिवक्ताओं के शैक्षिक अभिलेखों का भी संबंधित विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराया गया था। सत्यापन के दौरान विश्वविद्यालयों की ओर से उनके अंकपत्रों को गलत एवं असत्य बताए जाने का उल्लेख पुलिस को दी गई तहरीर में किया गया है।
इस तरह प्रतापगढ़ के चार अधिवक्ताओं के नाम 68 अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे में शामिल हैं। पुलिस अब मामले में दर्ज आरोपों और संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी।
विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से होगी जांच की कड़ियां साफ
इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका विश्वविद्यालयों से कराए जा रहे सत्यापन की मानी जा रही है। बार काउंसिल द्वारा अधिवक्ताओं के शैक्षिक अभिलेखों को संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से मिलाया जा रहा है। डिग्री और अंकपत्र जारी होने की वास्तविकता, रोल नंबर, परीक्षा वर्ष तथा विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध विवरण की जांच की जा रही है।
यदि किसी अभिलेख में दर्ज जानकारी विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से अलग मिलती है तो उसे जांच का आधार बनाया जा रहा है। इसी सत्यापन प्रक्रिया में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
अन्य अधिवक्ताओं पर भी गिर सकती है गाज
बार काउंसिल की ओर से अभी अन्य अधिवक्ताओं के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन भी जारी बताया जा रहा है। ऐसे में यह मामला फिलहाल 68 अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। जांच के दौरान यदि अन्य अधिवक्ताओं के दस्तावेजों में भी अनियमितता, गलत जानकारी या विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से विसंगति सामने आती है तो उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई के बाद अधिवक्ता जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में बार काउंसिल द्वारा की जा रही दस्तावेजी जांच को गंभीर कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले शैक्षिक अभिलेखों की सत्यता की जांच अब और सख्ती से की जाएगी।
पुलिस ने शुरू की पड़ताल
बार काउंसिल सचिव आरके शुक्ला की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस प्राथमिकी में दर्ज नामों से जुड़े दस्तावेजों, विश्वविद्यालयों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करेगी।
हालांकि, मुकदमा दर्ज होना आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जाता। पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में संबंधित तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई ने कथित तौर पर गलत शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर अधिवक्ता पंजीकरण कराने के मामलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बार काउंसिल द्वारा जारी सत्यापन प्रक्रिया और पुलिस जांच के आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।







