प्रतापगढ़। कोतवाली देहात पुलिस ने गैस सिलेंडरों से कथित तौर पर गैस चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और मौके से दो पिकअप वाहनों समेत करीब 108 गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। इसके साथ ही गैस चोरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, सील लगाने की मशीन और अन्य सामग्री भी पुलिस के हाथ लगी है। पुलिस की कार्रवाई के बाद गैस एजेंसियों से लेकर उपभोक्ताओं तक सिलेंडर आपूर्ति की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी गैस एजेंसियों से सिलेंडर लोड कराकर उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए निकलते थे। रास्ते में सकरौली गांव स्थित एक बगिया में पिकअप वाहन रोककर सिलेंडरों से गैस निकालने का कथित खेल किया जाता था। आरोप है कि प्रत्येक सिलेंडर से करीब तीन से चार किलो गैस निकाल ली जाती थी। इसके बाद सिलेंडर पर दोबारा सील लगा दी जाती थी, जिससे बाहर से सिलेंडर सामान्य और पूरी तरह सीलबंद दिखाई देता था।
पुलिस का कहना है कि इस तरीके से उपभोक्ताओं को पूरे वजन का सिलेंडर मिलने का भ्रम बना रहता था। गैस निकालने के बाद सिलेंडरों को निर्धारित स्थानों पर पहुंचा दिया जाता था। लंबे समय तक इस तरह की गतिविधि चलने से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
108 सिलेंडर और चोरी के उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से करीब 108 गैस सिलेंडर बरामद किए। इनमें 12 सिलेंडर खाली बताए जा रहे हैं। इसके अलावा छोटे-बड़े कई अन्य सिलेंडर, गैस निकालने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, सील लगाने की मशीन और अन्य सामग्री भी पुलिस ने बरामद की है। पुलिस ने दो पिकअप वाहनों को भी कब्जे में लिया है।
बरामदगी के बाद पुलिस अब पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच की जा रही है कि कथित तौर पर गैस चोरी का यह कारोबार कब से चल रहा था और इससे कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि चोरी की गई गैस को कहां और किसके माध्यम से खपाया जाता था।
गैस एजेंसी कर्मचारियों की भूमिका पर भी जांच
पुलिस जांच में कटरा मेंदनीगंज स्थित सौरभ इंडेन समेत कुछ अन्य गैस एजेंसियों से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आ रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि एजेंसी से सिलेंडर निकलने के बाद उन्हें रास्ते में कहां रोका जाता था और कथित तौर पर गैस निकालने के लिए किस स्तर पर सहयोग किया जाता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार संदीप, प्रदीप, सतीश, प्रिंशु और भोलानाथ समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। हालांकि, इन लोगों पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर कथित गिरोह के नेटवर्क, गैस चोरी के तरीके, गैस की बिक्री और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। कार्रवाई से यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि सिलेंडरों से वास्तव में तीन से चार किलो तक गैस निकाली जा रही थी तो यह सिलसिला कितने समय से चल रहा था और इसकी भनक संबंधित एजेंसियों को क्यों नहीं लगी। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ गैस चोरी के कथित नेटवर्क से जुड़े कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।







