80 साल पुराना रास्ता बंद होने से मचा हाहाकार, डीएम के दरबार पहुंचे ग्रामीण; बोले- रास्ता खुलवाइए साहब, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज हुआ मुश्किल
प्रतापगढ़। पृथ्वीगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या-15 औवार में यादव बस्ती और पाल बस्ती को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग को बंद किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है। रास्ता बंद होने के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में गांव के बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और अन्य ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी प्रतापगढ़ से मुलाकात कर रास्ता बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए मामले में तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई।
ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता कोई नया या अस्थायी रास्ता नहीं है, बल्कि करीब 80 वर्षों से भी अधिक समय से लोग इसी मार्ग का इस्तेमाल करते चले आ रहे हैं। इसी रास्ते से यादव बस्ती और पाल बस्ती के लोग बाजार, स्कूल, अस्पताल तथा अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचते हैं। अचानक मुख्य मार्ग बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों के अस्पताल पहुंचने तक पर संकट
ग्रामीणों ने बताया कि रास्ता बंद होने का सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बस्ती के बच्चों को स्कूल जाने के लिए अब लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। कई बच्चों के लिए यह परेशानी रोजाना की समस्या बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर स्कूल पहुंचने में दिक्कत होने के साथ ही छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावक चिंतित हैं।
वहीं, किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने की स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक मुख्य मार्ग बंद होने के कारण मरीजों को अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय लग सकता है। आपात स्थिति में यह देरी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि रास्ते को तत्काल बहाल कराया जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने में परेशानी न उठानी पड़े।
रोजमर्रा की जरूरतों का सामान लाना भी मुश्किल
स्थानीय लोगों के अनुसार इसी रास्ते से ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरत का सामान लाते-ले जाते हैं। रास्ता बंद होने के बाद लोगों को दूसरे मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे दूरी और परेशानी दोनों बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस्तेमाल में रहे इस रास्ते के बंद होने से पूरे क्षेत्र का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि रास्ता उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि वर्षों से उनकी बस्ती को मुख्य मार्ग और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। उनका आरोप है कि रास्ता बंद होने से दो बस्तियों के सैकड़ों लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।

बच्चे-बुजुर्ग और महिलाएं लेकर पहुंचे अपनी फरियाद
मंगलवार को ग्रामीणों का समूह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा तो उनके साथ बड़ी संख्या में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखते हुए रास्ता खुलवाने की मांग की। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते रास्ता बहाल नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मौके की जांच कराने तथा राजस्व एवं संबंधित अधिकारियों को भेजकर रास्ते की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने वर्षों से चले आ रहे आवागमन के रास्ते को बहाल कराने की अपील की।
प्रशासन से ग्रामीणों को कार्रवाई की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जिला प्रशासन से पूरी उम्मीद है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा। लोगों ने कहा कि रास्ता बंद होने का सीधा असर बच्चों की शिक्षा, मरीजों के उपचार और ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ऐसे में प्रशासन को जल्द से जल्द मामले की जांच कराकर ग्रामीणों के आवागमन की समस्या का समाधान करना चाहिए।
फिलहाल ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी फरियाद पहुंचा दी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। 80 वर्षों से इस्तेमाल किए जा रहे बताए जा रहे इस मार्ग को लेकर ग्रामीणों की मांग है कि जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि रास्ता सार्वजनिक आवागमन का है तो उसे तत्काल बहाल कराया जाए।







