प्रतापगढ़। ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतापगढ़ में न्यायिक अधिकारियों द्वारा एक अनोखी पहल की गई। जिला जज राजीव कमल पांडे सहित जिले के कई न्यायिक अधिकारी अपने आवास से लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर न्यायालय पहुंचे। इस पहल के जरिए उन्होंने समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि हर व्यक्ति अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करे, तो ऊर्जा संकट जैसी बड़ी चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
न्यायालय पहुंचने के बाद जिला जज राजीव कमल पांडे ने अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मचारियों और आम नागरिकों से पेट्रोल-डीजल के अनावश्यक उपयोग को कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि ईंधन की सीमित उपलब्धता और बढ़ती खपत को देखते हुए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, ई-रिक्शा, साइकिल और पैदल चलने जैसे विकल्पों को अपनाने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने कार पूलिंग यानी एक वाहन को कई लोगों द्वारा साझा उपयोग करने की अपील भी की। उनका कहना था कि यदि लोग छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें तो इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
जिला जज ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारी स्वयं भी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं और भविष्य में पैदल या साइकिल से न्यायालय पहुंचने को लेकर भी सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी जजों ने साइकिल और ई-रिक्शा से न्यायालय पहुंचकर ऊर्जा संरक्षण का संदेश दिया था।
इधर न्यायिक अधिकारियों की इस पहल के बाद आम जनता के बीच भी नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में ईंधन की बचत को लेकर गंभीर है तो मोटरसाइकिल पर तीन लोगों के बैठकर यात्रा करने के नियम पर भी विचार होना चाहिए। लोगों का तर्क है कि यदि दो मोटरसाइकिलों की जगह एक ही बाइक पर तीन लोग सफर करें तो पेट्रोल की खपत कम होगी और इससे ईंधन की बचत भी हो सकती है। साथ ही कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को चालान नहीं करना चाहिए।
हालांकि मौजूदा यातायात नियमों के अनुसार मोटरसाइकिल पर चालक सहित केवल दो व्यक्तियों को यात्रा की अनुमति है। तीन सवारी बैठाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इस पर चालान की कार्रवाई की जा सकती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन बचत महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा नियमों से समझौता करना दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।
ऊर्जा संरक्षण को लेकर शुरू हुई यह पहल अब लोगों के बीच नई बहस का विषय बन गई है कि ईंधन बचत और सड़क सुरक्षा के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।







