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प्रतापगढ़: सपा विधायक डॉ. आरके वर्मा के खिलाफ साइबर थाने में मुकदमा दर्ज, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

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प्रतापगढ़। जनपद की सियासत में उस समय हलचल मच गई जब रानीगंज विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक डॉ. आरके वर्मा के खिलाफ साइबर क्राइम थाना प्रतापगढ़ में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। यह कार्रवाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिलाध्यक्ष अंशुमान सिंह द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर की गई है। मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जबकि पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजयुमो जिलाध्यक्ष अंशुमान सिंह ने 17 जून 2026 को साइबर क्राइम थाना प्रतापगढ़ में एक लिखित तहरीर देकर आरोप लगाया कि सपा विधायक डॉ. आरके वर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसमें सांसद प्रतिनिधि एवं अभिनेत्री कंगना रनौत के संबंध में कथित रूप से अभद्र, अपमानजनक तथा महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि विधायक द्वारा की गई टिप्पणी न केवल एक महिला की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में अपेक्षित शालीनता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के भी विपरीत प्रतीत होती है।

अंशुमान सिंह ने अपनी शिकायत में कहा कि जनप्रतिनिधियों से समाज एक सकारात्मक और मर्यादित आचरण की अपेक्षा करता है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच, विशेषकर सोशल मीडिया पर, महिलाओं के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में गलत संदेश देता है। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की थी।

शिकायत के साथ उपलब्ध कराए गए स्क्रीनशॉट एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों का प्रारंभिक परीक्षण करने के बाद साइबर क्राइम थाना प्रतापगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने विधायक डॉ. आरके वर्मा के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 तथा सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 67 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया है।

रानीगंज के विधायक डॉ आरके वर्मा के इसी फेसबुक पोस्ट पर दर्ज हुआ साइबर थाना पर मुकदमा

बताया जा रहा है कि विवाद की जड़ एक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाजपा समर्थकों ने जहां इसे महिलाओं के सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कार्रवाई का स्वागत किया है, वहीं समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई करार दे रहे हैं। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी पक्ष के दावों की पुष्टि नहीं की है और जांच पूरी होने तक कोई निष्कर्ष निकालने से बच रही है।

सूत्रों के अनुसार, साइबर पुलिस अब संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, उसके मूल स्रोत, पोस्ट की सत्यता तथा उससे जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित पोस्ट विधायक के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ही साझा की गई थी या नहीं। जांच के दौरान डिजिटल फोरेंसिक साक्ष्यों को भी शामिल किया जा सकता है।

इस प्रकरण ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें एक वर्तमान विधायक का नाम शामिल है और मामला सोशल मीडिया के उपयोग तथा सार्वजनिक आचरण से जुड़ा हुआ है।

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज राजनीतिक अभिव्यक्ति का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही अभद्र टिप्पणियों, आपत्तिजनक पोस्ट और विवादित बयानों को लेकर कानूनी कार्रवाई के मामलों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे मामलों में पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच करती है और दोष सिद्ध होने पर संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है।

फिलहाल प्रतापगढ़ में दर्ज इस मुकदमे ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है और जांच के बाद इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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