बैशपुर बाजार में टूटी नालियां बनीं आफत, कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में उबाल; जिलाधिकारी को फिर सौंपा गया अनुस्मारक
प्रतापगढ़। मांधाता विकासखंड के बैशपुर बाजार में टूटी हुई नालियां और बदहाल जल निकासी व्यवस्था अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। लगातार शिकायतों और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद समस्या का समाधान न होने से ग्रामीणों, दुकानदारों और राहगीरों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। बरसात के चलते हालात और भी बदतर हो गए हैं। सड़क पर गंदा पानी भर जाने से पूरे बाजार की तस्वीर बदल गई है और लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बैशपुर बाजार की मुख्य सड़क के किनारे बनी नालियां लंबे समय से टूटी पड़ी हैं। नालियों की सफाई और मरम्मत न होने के कारण बारिश का पानी और गंदा नाला सड़क पर फैल जाता है। इससे बाजार में कीचड़ और जलभराव की स्थिति बनी रहती है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बचता रहा है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर 26 जून 2026 को जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को प्रार्थना पत्र देकर नालियों के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की गई थी। लेकिन एक महीने बीतने के बाद भी न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही कोई निर्माण कार्य शुरू कराया गया। प्रशासन की इस उदासीनता से नाराज होकर एक बार फिर जिलाधिकारी को अनुस्मारक सौंपा गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में बाजार की स्थिति बेहद दयनीय हो जाती है। सड़क पर कई-कई दिनों तक गंदा और बदबूदार पानी जमा रहता है। इससे दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वहीं पैदल चलने वाले लोगों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना जलभराव और कीचड़ के बीच से होकर निकलना पड़ता है। कई बार बच्चे और बुजुर्ग फिसलकर गिर चुके हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गंदे पानी के लगातार जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। बदबू के कारण बाजार में खड़ा होना तक मुश्किल हो गया है। लोगों को डर है कि यदि जल्द जल निकासी की व्यवस्था नहीं कराई गई तो डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस जनसमस्या को समाचार पत्रों और डिजिटल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रमुखता से उठाया गया, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर जाए। इसके बावजूद संबंधित विभाग ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि उनकी समस्याओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
अनुस्मारक में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि पूरे मामले की तत्काल जांच कराई जाए, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और टूटी हुई नालियों का शीघ्र निर्माण कराया जाए। साथ ही जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित कर आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द से जल्द शुरू कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।
ग्रामीणों और व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन अब भी चुप्पी साधे रहा और जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि वर्षों से उपेक्षा झेल रहे बैशपुर बाजार के लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए, ताकि बरसात के हर मौसम में उन्हें इसी तरह की बदहाल स्थिति का सामना न करना पड़े।







