Home राज्य उत्तर प्रदेश महुली हादसा: शासन ने दी ₹26.20 लाख की राहत, पीड़ित परिवार के...

महुली हादसा: शासन ने दी ₹26.20 लाख की राहत, पीड़ित परिवार के साथ खड़ा प्रशासन

https://rubaruindia.com/wp-content/uploads/2026/08/5384793.png

महुली त्रासदी: एक रात में उजड़ गया पूरा परिवार, 100 साल पुराने मकान ने ली 6 जिंदगियां, प्रशासन से लेकर एडीजी-आईजी तक पहुंचे गांव, ₹26.20 लाख की राहत सहायता

https://youtu.be/M2NMcO8Pujs

बारिश, जर्जर मकान और एक पल में मातम… प्रतापगढ़ के महुली गांव की वह रात जिसे लोग कभी नहीं भूल पाएंगे

प्रतापगढ़। जनपद के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित महुली गांव में लगातार हो रही बारिश के बीच बुधवार देर रात हुआ हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर गया। करीब 100 वर्ष पुराना जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर पड़ा और कुछ ही सेकेंड में एक ही परिवार के छह सदस्य मलबे में दब गए। जब तक ग्रामीण और राहत टीमें मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकाल पातीं, तब तक छह लोगों की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ा दी। हादसे के बाद प्रशासन, पुलिस और शासन पूरी तरह सक्रिय हो गया। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एडीजी और आईजी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तथा पीड़ित परिवार को कुल ₹26.20 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।


रात दो बजे मौत बनकर टूटा मकान

जानकारी के अनुसार महुली गांव निवासी प्रमोद श्रीवास्तव का लगभग 100 वर्ष पुराना मकान लगातार बारिश के कारण बेहद कमजोर हो चुका था। बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजे पूरा परिवार घर के भीतर सो रहा था। अचानक मकान की दीवारें और छत भरभराकर गिर गईं। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े, लेकिन तब तक पूरा मकान मलबे में तब्दील हो चुका था।

ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू किया। पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। कुछ ही देर में पुलिस, राजस्व विभाग, फायर सर्विस तथा अन्य राहत टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया गया।


एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत

इस भीषण हादसे में परिवार के छह सदस्यों की जान चली गई। मृतकों में—

  • प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष)
  • रीता श्रीवास्तव (55 वर्ष)
  • नितिन श्रीवास्तव (25 वर्ष)
  • माधुरी श्रीवास्तव (23 वर्ष)
  • मासूम माधव (1 वर्ष)
  • अद्विक उर्फ बाबू (10 माह)

की मौके पर ही अथवा अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई।

हादसे में परिवार के सदस्य अमन श्रीवास्तव (28 वर्ष) सुरक्षित बच गए। एक ही परिवार के छह लोगों की मौत से गांव में मातम पसर गया। हर आंख नम थी और पूरे गांव में चीख-पुकार का माहौल था।


महज कुछ सेकेंड में खत्म हो गया पूरा आशियाना

जिस मकान में वर्षों से परिवार हंसी-खुशी रह रहा था, वही मकान कुछ ही पलों में मौत का कारण बन गया। लगातार बारिश के कारण मकान की दीवारें कमजोर हो चुकी थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मकान काफी पुराना था और लगातार हो रही वर्षा के चलते उसकी हालत और खराब हो गई थी।

हादसे के बाद पूरे गांव में भय का माहौल बन गया। कई लोगों ने अपने पुराने मकानों को खाली करना शुरू कर दिया।


ग्रामीणों ने दिखाई इंसानियत, रातभर चलता रहा राहत अभियान

हादसे की सूचना मिलते ही गांव के सैकड़ों लोग मौके पर जुट गए। किसी ने फावड़ा उठाया तो किसी ने ईंटें हटानी शुरू कर दीं। लोग अपने हाथों से मलबा हटाकर परिजनों को बचाने की कोशिश करते रहे।

बाद में पुलिस, प्रशासन और राहत दल भी मौके पर पहुंचे। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाया गया। हालांकि तब तक छह लोगों की जान जा चुकी थी।


पोस्टमार्टम के बाद नम आंखों से हुआ अंतिम संस्कार

पुलिस ने सभी शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया। गुरुवार को जब शव गांव पहुंचे तो पूरे गांव में मातम छा गया। परिजनों और ग्रामीणों की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मासूम बच्चों के शव देखकर हर किसी का कलेजा कांप उठा।


जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक पहुंचे महुली

घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की तथा पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को शासन द्वारा अनुमन्य सभी सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए।

पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने कहा कि घटना से संबंधित सभी आवश्यक विधिक कार्रवाई नियमानुसार पूरी कराई गई है तथा पुलिस पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।


पीड़ित परिवार को मिली ₹26.20 लाख की सहायता

जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध करा दी गई है।

राहत सहायता का विवरण इस प्रकार है—

  • छह मृतकों के लिए दैवीय आपदा राहत मद से ₹24 लाख (प्रति मृतक ₹4 लाख)
  • पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए ₹1.20 लाख
  • मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना के अंतर्गत ₹1 लाख

इस प्रकार कुल ₹26.20 लाख की राहत सहायता स्वीकृत कर पीड़ित परिवार को उपलब्ध करा दी गई।


बारिश को देखते हुए प्रशासन ने जारी किए निर्देश

जिलाधिकारी ने लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण करें।

उन्होंने विशेष रूप से जर्जर एवं असुरक्षित मकानों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने तथा लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


एडीजी और आईजी ने भी किया निरीक्षण

घटना की गंभीरता को देखते हुए ज्योति नारायण तथा अजय कुमार मिश्रा भी महुली गांव पहुंचे।

दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से पूरी जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

एडीजी और आईजी ने हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।


जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी जताया दुख

हादसे के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

इससे पहले समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी और अन्य पदाधिकारी भी पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर सांत्वना दे चुके हैं।


पूरे जिले में शोक, उठने लगे कई सवाल

महुली हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और जर्जर मकानों की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतने पुराने और कमजोर मकान में परिवार क्यों रह रहा था? क्या समय रहते इसकी पहचान कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सकता था? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर मकानों का नियमित सर्वे हो रहा है?

हालांकि प्रशासन का कहना है कि अब सभी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर ऐसे मकानों की पहचान की जाएगी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


एक ऐसी त्रासदी जिसे प्रतापगढ़ लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा

महुली गांव की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्द है जिसने पूरे प्रतापगढ़ को झकझोर दिया। एक ही परिवार के छह सदस्यों का एक साथ दुनिया से चले जाना हर किसी की आंखें नम कर गया। मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्ग दंपती तक की मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।

अब प्रशासन राहत, पुनर्वास और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के प्रयासों में जुटा है। लेकिन महुली की उस भयावह रात की चीखें, मलबे में दबी उम्मीदें और उजड़ चुके परिवार का दर्द शायद वर्षों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।

Leave a Reply