महुली में 6 मौतों के बाद फिर टला बड़ा हादसा, रानीगंज में भरभराकर गिरा कच्चा मकान, बाल-बाल बचा पूरा परिवार
प्रतापगढ़। नगर कोतवाली क्षेत्र के महुली गांव में जर्जर मकान गिरने से एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत का गम अभी जिले के लोगों के दिलों से उतरा भी नहीं था कि गुरुवार दोपहर रानीगंज थाना क्षेत्र में एक और बड़ा हादसा होते-होते टल गया। महुली की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था, वहीं कुछ ही घंटों बाद पंडितपुर हरिनाहपुर गांव में बारिश के कारण एक कच्चा मकान का पिछला हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। राहत की बात यह रही कि इस बार परिवार के सभी सदस्य कुछ मिनट पहले ही घर से बाहर निकल गए थे, जिससे उनकी जान बच गई। महुली जैसी त्रासदी दोहराने से बच गई।

जानकारी के अनुसार पंडितपुर हरिनाहपुर निवासी रिंकी मिश्रा, जिनके पति स्वर्गीय पुष्पराज मिश्र का करीब पांच वर्ष पहले निधन हो चुका है, अपनी चार बेटियों और बुजुर्ग ससुर दिवाकर मिश्रा के साथ कच्चे मकान में रहती हैं। परिवार का गुजारा बुजुर्ग ससुर की छोटी सी पान-गुटखा की गुमटी से होने वाली आमदनी पर चलता है।
गुरुवार दोपहर करीब दो बजे लगातार बारिश के चलते मकान की दीवारें कमजोर हो गईं और देखते ही देखते पूरा कच्चा मकान का पिछला हिस्सा भरभराकर जमीन पर गिर पड़ा। तेज धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े। शुरुआत में सभी को यही आशंका थी कि कहीं परिवार मलबे में तो नहीं दब गया। लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि रिंकी मिश्रा अपनी बेटियों—आस्था (14), आराध्या (12), आयुषी (10) और आरोही (8)—के साथ किसी काम से घर से बाहर थीं। यह सुनकर पूरे गांव ने राहत की सांस ली।
महुली की सुबह और रानीगंज की दोपहर ने जिले को एक बड़ा संदेश दिया है। एक ओर महुली में छह लोगों की जान नहीं बच सकी, वहीं दूसरी ओर रानीगंज में किस्मत ने एक पूरे परिवार को नया जीवन दे दिया। लगातार हो रही बारिश के बीच जर्जर और कच्चे मकानों में रह रहे परिवारों के लिए खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
अब रिंकी मिश्रा का परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया है। सिर पर छत नहीं बची है और सबसे बड़ी चिंता चार मासूम बेटियों के सुरक्षित भविष्य की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, अस्थायी आवास और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए ताकि उन्हें दोबारा ऐसी भयावह स्थिति का सामना न करना पड़े।
महुली की दर्दनाक चीखें अभी थमी नहीं थीं कि रानीगंज में मौत फिर दरवाजे तक पहुंच गई। फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस बार किस्मत ने समय रहते एक मां और उसकी चार बेटियों को अपनी आगोश में समेट लिया, लेकिन उनका आशियाना मलबे में बदल गया।







