थाने में बवाल: महिला सिपाही की वर्दी फाड़ी, दहेज विवाद की पंचायत बनी रणक्षेत्र, 6 पर मुकदमा
प्रतापगढ़। जनपद के जेठवारा थाना क्षेत्र में दहेज उत्पीड़न के एक मामले को सुलझाने के लिए बुलाई गई पंचायत उस समय हिंसक संघर्ष में बदल गई, जब दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। सबसे गंभीर बात यह रही कि विवाद को शांत कराने पहुंची महिला सिपाही के साथ भी अभद्रता की गई और उसकी वर्दी तक फाड़ दी गई। थाने परिसर में हुई इस घटना ने कानून व्यवस्था और पुलिस की गरिमा को खुली चुनौती दे दी है।
जानकारी के अनुसार, जेठवारा थाना क्षेत्र के बरई का पुरवा डेरवा निवासी रामकुमार धुरिया की पुत्री सीमा का विवाह लगभग एक वर्ष पूर्व धनसारी गांव निवासी सुनील कुमार धुरिया के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही सीमा ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। पीड़िता का कहना है कि ससुराल पक्ष लगातार अतिरिक्त दहेज की मांग कर रहा था और मांग पूरी न होने पर उसे मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
सीमा ने आरोप लगाया कि उसके ऊपर झूठा चोरी का आरोप लगाया गया, उसके जेवर छीन लिए गए और उसके साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया। पीड़िता द्वारा पुलिस से शिकायत किए जाने के बाद मामले को सुलझाने के उद्देश्य से रविवार शाम दोनों पक्षों को जेठवारा थाने बुलाया गया था।
थाने में पंचायत के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि विवाद के दौरान पति सुनील कुमार तथा उसके परिजनों ने सीमा और उसके मायके पक्ष के लोगों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और थाने परिसर में ही मारपीट शुरू हो गई।
घटना के दौरान वहां मौजूद महिला सिपाही प्रीति ने आगे बढ़कर दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया। लेकिन आरोप है कि उग्र लोगों ने महिला सिपाही के साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्रता की। इतना ही नहीं, हाथापाई के दौरान महिला सिपाही की वर्दी तक फाड़ दी गई। थाने परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों के सामने हुई इस घटना से अफरा-तफरी मच गई।
थाने के भीतर एक महिला पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और सरकारी कार्य में बाधा डालने की घटना ने पुलिस महकमे को भी झकझोर दिया है। कानून के रखवालों के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल गंभीर अपराध है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था और कानून के प्रति खुली अवमानना भी माना जा रहा है।
घटना के बाद पीड़िता सीमा की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति सुनील कुमार, ननद सरिता, आरती, पूजा, बबिता तथा रायबरेली जनपद के सलवन निवासी नंदोई गुलशन समेत छह लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट, सरकारी कार्य में बाधा डालने और महिला सिपाही के साथ अभद्रता से संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि थाने के अंदर ही विवाद हिंसा का रूप ले ले और पुलिसकर्मी सुरक्षित न रहें, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था को चुनौती देने का साहस न कर सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि थाने में कानून व्यवस्था बिगाड़ने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को संकलित किया जा रहा है।
दहेज उत्पीड़न के आरोपों से शुरू हुआ यह विवाद अब कानून व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बन चुका है। एक ओर जहां पीड़िता अपने साथ हुए उत्पीड़न की न्याय की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर थाने में महिला सिपाही के साथ हुई अभद्रता ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक गंभीर बना दिया है।
जेठवारा थाने में हुई यह घटना कई सवाल खड़े करती है। आखिर सुलह-समझौते के लिए बुलाई गई पंचायत हिंसा में कैसे बदल गई? थाने परिसर में महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ने की हिम्मत आरोपियों को कैसे मिली? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन इतना तय है कि कानून के सामने दबंगई और अराजकता का प्रदर्शन करने वालों पर अब पुलिस की सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।







