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नाली विवाद में पड़ोसियों पर मारपीट का आरोप, मां-बेटी और मासूम घायल; इंसाफ के लिए एसपी दरबार पहुंची पीड़िता

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पीड़िता ने आरोप लगाया कि रानीगंज पुलिस ने उल्टा पीड़िता और उनके बच्ची पर मुकदमा दर्ज कर दिया पुलिस की मिलीभगत से फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया गया इसके पहले भी पीड़िता पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है पीड़िता ने रानीगंज पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है।


प्रतापगढ़। जनपद के रानीगंज थाना क्षेत्र के नरसिंहगढ़ गांव में मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। नाली के पानी को लेकर हुए विवाद में पड़ोसियों पर मां, बेटी और एक मासूम बच्चे के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। पीड़िता ने पुलिस पर भी सुनवाई न करने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।

नरसिंहगढ़ गांव की रहने वाली नजमा बानो ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में बताया कि बीते 5 मई की रात करीब 8 बजे उनके पड़ोस में रहने वाले अनवर समेत अन्य लोगों ने नल के पानी की निकासी वाली नाली को बंद कर दिया था। जब वह नाली खोलने पहुंची तो आरोप है कि विपक्षी पक्ष के लोग एक राय होकर गाली-गलौज करने लगे और देखते ही देखते मारपीट शुरू कर दी।



पीड़िता का कहना है कि जब घर की अन्य महिलाएं बीच-बचाव करने पहुंचीं तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। इसी दौरान रोता-बिलखता एक मासूम बच्चा समद वहां पहुंचा तो उसे भी नहीं बख्शा गया। आरोप है कि बच्चे को बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसके कंधे में गंभीर चोट आ गई और वह दर्द से चीख उठा। घटना के बाद परिवार के लोग घायल अवस्था में रानीगंज थाने पहुंचे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें सुबह आने की बात कहकर लौटा दिया।

पीड़िता के अनुसार अगले दिन जब वह फिर थाने पहुंची तो घंटों बैठाए रखा गया। आरोप है कि न तो मेडिकल कराया गया और न ही मुकदमा दर्ज किया गया। शाम तक इंतजार कराने के बाद अगले दिन आने की बात कह दी गई। लगातार चक्कर लगाने और सुनवाई न होने से परेशान होकर आखिरकार पीड़िता पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के पास पहुंची और पूरे मामले से अवगत कराया।

नजमा बानो का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक से मिलने के बाद जब वह दोबारा थाने पहुंचीं तो थानेदार ने साफ शब्दों में कह दिया कि “चाहे जहां जाओ, मुकदमा नहीं लिखा जाएगा।” पीड़िता का कहना है कि थानेदार ने यह भी कहा कि बच्चे की चोट पुरानी है और उसका इलाज पहले से प्रतापगढ़ में चल रहा है, जबकि पीड़िता ने इस बात से साफ इनकार किया। उनका कहना है कि बच्चे को चोट घटना वाले दिन मारपीट में ही लगी है।

पीड़िता ने सवाल उठाया कि बिना मेडिकल जांच के पुलिस आखिर कैसे यह तय कर सकती है कि चोट पुरानी है या नई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष लगातार गाली-गलौज और धमकी दे रहा है, जिससे परिवार दहशत में है। पीड़िता का कहना है कि उन्हें डर है कि कभी भी उनके साथ कोई बड़ी घटना हो सकती है।

अब पीड़ित परिवार अपने मासूम बच्चे को लेकर न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो विवाद और बढ़ सकता है। फिलहाल पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा की मांग की है।

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