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कलेक्ट्रेट में अतिक्रमण पर डीएम का सख्त रुख, एक सप्ताह में हटेंगे अवैध कब्जे; जाम, गंदगी और अव्यवस्था से मिलेगी राहत

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प्रतापगढ़। कलेक्ट्रेट परिसर को व्यवस्थित, स्वच्छ और आम लोगों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट परिसर में किए गए अवैध कब्जों और अनियमित वाहन पार्किंग को लेकर सार्वजनिक सूचना जारी कर सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी अवैध कब्जे स्वयं हटा लिए जाएं, अन्यथा प्रशासनिक टीम अभियान चलाकर बलपूर्वक कार्रवाई करेगी। कार्रवाई के दौरान आने वाला खर्च भी संबंधित अतिक्रमणकारियों से ही वसूला जाएगा।

जिलाधिकारी की इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल कब्जे हटाना नहीं, बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर को ऐसी व्यवस्था देना है, जिससे यहां आने वाले वादकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लंबे समय से परिसर में कई स्थानों पर अस्थायी निर्माण, छाजन, गुमटियां और अन्य प्रकार के कब्जे होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।

कहां-कहां किए गए हैं अवैध कब्जे

जिला प्रशासन के अनुसार कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित विभिन्न राजकीय भवनों के आसपास, सेप्टिक टैंकों के पास, नवनिर्मित वादकारी शेड के नीचे बने पार्किंग स्थल, बाउंड्रीवाल के किनारे और अन्य खाली स्थानों पर अवैध रूप से कब्जे कर लिए गए हैं। कई लोगों ने अस्थायी छाजन बनाकर सामान रखने, दुकान लगाने या अन्य गतिविधियों के लिए जगह घेर रखी है।

इसके अलावा कलेक्ट्रेट परिसर में आने-जाने वाले मार्गों पर भी कई बार वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे रास्ते संकरे हो जाते हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ता है। विशेषकर मुकदमों की सुनवाई के लिए आने वाले वादकारियों, बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग लोगों को अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।

क्या दिक्कत आती है अतिक्रमण से

कलेक्ट्रेट जिले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र होता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने कामों को लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में अवैध कब्जे और बेतरतीब पार्किंग कई समस्याओं को जन्म देती है।

सबसे बड़ी समस्या आवागमन की होती है। रास्तों पर वाहन खड़े होने और अस्थायी निर्माण होने से लोगों को निकलने में परेशानी होती है। कई बार भीड़ के समय जाम जैसी स्थिति बन जाती है। आपात स्थिति में एंबुलेंस या अन्य जरूरी वाहनों के निकलने में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है।

इसके अलावा अवैध कब्जों के कारण परिसर की सुंदरता और स्वच्छता भी प्रभावित होती है। अस्थायी निर्माणों के आसपास गंदगी जमा होने, कूड़ा फैलने और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। सरकारी भवनों के आसपास कब्जे होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।

कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों में प्रशासनिक व्यवस्था की पहली छवि इसी परिसर से बनती है। ऐसे में अव्यवस्थित माहौल से आम लोगों में गलत संदेश जाता है।

वादकारियों और अधिवक्ताओं को होती है परेशानी

कलेक्ट्रेट में प्रतिदिन राजस्व, न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जमीन विवाद, प्रमाण पत्र, शिकायत, सुनवाई और अन्य सरकारी कार्यों के लिए आने वाले लोगों को कई बार वाहन खड़ा करने की जगह नहीं मिलती।

अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी अपने कार्यों के लिए अलग-अलग कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। रास्तों पर अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण बुजुर्ग और दूर-दराज से आने वाले लोगों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

हटने के बाद क्या होगा फायदा

अतिक्रमण हटने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में आवागमन आसान होगा। लोगों को चलने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी और वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थल पर व्यवस्थित तरीके से खड़ा किया जा सकेगा।

खाली होने वाले स्थानों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। परिसर में सफाई व्यवस्था मजबूत होगी और सरकारी भवनों के आसपास बेहतर माहौल तैयार होगा। आम नागरिकों को अपने काम के लिए कार्यालयों तक पहुंचने में कम समय लगेगा।

इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आएगी। अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। कलेक्ट्रेट परिसर अधिक साफ-सुथरा और व्यवस्थित नजर आएगा।

पहले भी दिए गए थे निर्देश

जिलाधिकारी ने बताया कि इससे पहले भी कार्यालय स्तर से अतिक्रमण हटाने के लिए निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। इसके बाद अब सार्वजनिक सूचना जारी कर अंतिम चेतावनी दी गई है।

प्रशासन ने सभी कब्जाधारियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय के अंदर स्वयं अपने अवैध कब्जे हटा लें, ताकि किसी प्रकार की कार्रवाई की स्थिति न बने। साथ ही वाहन स्वामियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे केवल निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही वाहन खड़े करें।

प्रशासन का अभियान होगा निर्णायक

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कब्जे नहीं हटाए गए तो अभियान चलाकर उन्हें हटाया जाएगा। इस दौरान होने वाले खर्च की वसूली संबंधित लोगों से की जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई भी की जाएगी।

डीएम के इस आदेश के बाद अब कलेक्ट्रेट परिसर में वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन का मानना है कि अतिक्रमण मुक्त और व्यवस्थित परिसर से आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और सरकारी कार्यों में भी सुगमता आएगी।

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